1980 में चांदी की ऐतिहासिक उड़ान से लेकर गिरावट तक,: 2026 में कीमत आधी होने की आशंका

2026 में कीमत आधी होने की आशंका
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Ai फोटो 

चांदी के दामों का इतिहास उतार चढ़ाव से भरा रहा है। साल 1980 में चांदी ने ऐसी रिकॉर्ड तेजी दिखाई थी, जिसने दुनियाभर के निवेशकों को चौंका दिया था। उस दौर में अमेरिका के हंट ब्रदर्स द्वारा बड़े पैमाने पर चांदी की खरीद और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के कारण चांदी की कीमत करीब सात गुना तक बढ़ गई थी। कुछ ही समय में चांदी निवेश का सबसे आकर्षक साधन बन गई थी और बाजार में भारी सट्टेबाजी देखने को मिली।


हालांकि यह तेजी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी। सरकारी हस्तक्षेप, नियमों में सख्ती और मांग में अचानक आई गिरावट के चलते चांदी के दाम तेजी से नीचे आ गए। जिन निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर खरीदारी की थी, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद चांदी की कीमतें लंबे समय तक दबाव में रहीं और बाजार ने यह सबक लिया कि अत्यधिक तेजी के बाद गिरावट भी उतनी ही तेज हो सकती है।

वर्तमान समय की बात करें तो एक बार फिर चांदी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। औद्योगिक मांग, सौर ऊर्जा सेक्टर में उपयोग और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की सोच ने चांदी को समर्थन दिया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता आती है, ब्याज दरों में बदलाव होता है या औद्योगिक मांग कमजोर पड़ती है, तो चांदी के दामों में बड़ी गिरावट देखी जा सकती है।


कुछ बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 तक चांदी की कीमतें अपने मौजूदा स्तर से लगभग आधी तक गिर सकती हैं। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि मौजूदा तेजी काफी हद तक अटकलों और अस्थायी मांग पर टिकी है। अगर ये कारक कमजोर होते हैं, तो चांदी एक बार फिर 1980 के बाद जैसी गिरावट का सामना कर सकती है।

निवेश विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि चांदी में निवेश करते समय केवल तेजी के दौर को देखकर फैसला न लें। इतिहास गवाह है कि चांदी ने जहां निवेशकों को बड़ा मुनाफा दिया है, वहीं गलत समय पर की गई खरीदारी ने भारी नुकसान भी पहुंचाया है। ऐसे में 2026 को देखते हुए निवेशकों को सतर्कता और संतुलित रणनीति अपनाने की जरूरत है।

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