सावधान! आपकी जेब पर 'श्रिंक्लेशन' की मार: बिस्किट से लेकर टूथपेस्ट तक, वजन घटाकर खेल कर रही हैं कंपनियां

सावधान! आपकी जेब पर श्रिंक्लेशन की मार: बिस्किट से लेकर टूथपेस्ट तक, वजन घटाकर खेल कर रही हैं कंपनियां
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भीलवाड़ा | महंगाई के इस दौर में बड़ी कंपनियां अब ग्राहकों की जेब काटने का एक नया और गुप्त तरीका अपना रही हैं, जिसे अर्थशास्त्र की भाषा में 'श्रिंक्लेशन' (Shrinkflation) कहा जाता है। इसमें कंपनियां अपने उत्पादों की कीमत तो वही रखती हैं या मामूली बढ़ाती हैं, लेकिन पैकेट के अंदर मौजूद सामान का वजन और मात्रा (Quantity) चुपके से कम कर देती हैं। बिस्किट, टूथपेस्ट, साबुन और नमकीन जैसे रोजमर्रा के सामानों में यह 'खेल' बड़े स्तर पर चल रहा है।

बिस्किट: कीमत वही, पर पैकेट हुआ आधा

सबसे ज्यादा मार बच्चों के पसंदीदा बिस्किट पर पड़ी है। पहले जो 5 या 10 रुपये का बिस्किट का पैकेट आता था, उसमें बिस्किट की संख्या 8 से 10 होती थी। अब कंपनियां उसी दाम वाले पैकेट में मात्र 4 से 5 बिस्किट ही दे रही हैं। पैकेट के अंदर प्लास्टिक की ट्रे या हवा (नाइट्रोजन) भरकर उसे बाहर से बड़ा दिखाया जाता है, ताकि ग्राहक को वजन कम होने का अहसास न हो।

टूथपेस्ट और साबुन: घट गई ग्राम की मात्रा

टूथपेस्ट की ट्यूब में भी वजन का बड़ा खेल हो रहा है। पहले जो स्टैंडर्ड ट्यूब 100 ग्राम की आती थी, उसे घटाकर अब 80 या 85 ग्राम कर दिया गया है। इसी तरह नहाने के साबुन की टिकिया जो पहले 100 ग्राम की होती थी, वह अब 75 या 80 ग्राम की रह गई है। ग्राहकों का ध्यान अक्सर रैपर पर लिखे छोटे अक्षरों में दर्ज 'नेट वजन' पर नहीं जाता, जिसका फायदा कंपनियां उठा रही हैं।

चिप्स और नमकीन: गैस ज्यादा, सामान कम

स्नैक्स और नमकीन के पैकेट तो अब 'हवा के पैकेट' बनकर रह गए हैं। 5 और 10 रुपये वाले नमकीन के पैकेट में अब मात्रा इतनी कम हो गई है कि एक व्यक्ति की भूख भी शांत न हो। कंपनियां तर्क देती हैं कि सामान को टूटने से बचाने के लिए गैस भरी जाती है, लेकिन हकीकत में यह वजन की कमी को छिपाने का एक तरीका बन चुका है।

ग्राहक कैसे बचें इस धोखे से?

यूनिट प्राइस चेक करें: सामान खरीदते समय सिर्फ कीमत न देखें, पैकेट के कोने में लिखे 'नेट वजन' (Net Weight) को जरूर पढ़ें।

बड़ी पैकिंग की तुलना करें: कई बार छोटे पैकेट के मुकाबले बड़ी पैकिंग (जैसे 1 किलो या 500 ग्राम) लेना ज्यादा किफायती होता है।

पुराने पैकेट से तुलना: यदि आप नियमित कोई ब्रांड इस्तेमाल करते हैं, तो देखें कि क्या उसका आकार पहले से पतला या छोटा तो नहीं हो गया है।


तेल घी में भी खेल

क्या आपको भी बाजार में रिफाइंड तेल या देसी घी पहले से सस्ता मिल रहा है? अगर हाँ, तो खुश होने के बजाय एक बार पैकेट पर उसका वजन (Weight) जरूर चेक कर लें। बाजार में इन दिनों कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी छिपाने के लिए 'वजन घटाओ' का नया फॉर्मूला अपनाया है, जिससे न केवल आम ग्राहक बल्कि व्यापारी भी गुमराह हो रहे हैं।पैकिंग का मायाजाल: 910 की जगह 600 एमएलराजधानी के बाजारों में पहली बार रिफाइंड तेल तीन अलग-अलग पैकिंग में बिक रहा है। कंपनियां रेट बढ़ाने के बजाय चुपके से वजन कम कर नई पैकिंग उतार रही हैं।रिफाइंड तेल: पहले 910 एमएल का पैक 120-130 रुपये में मिलता था। अब कंपनियों ने इसे 160 रुपये कर दिया है, लेकिन ग्राहकों को लुभाने के लिए 120 रुपये में ही 600 एमएल की नई पैकिंग उतार दी है। ग्राहक को लगता है कि उसे पुराने रेट पर ही तेल मिल रहा है, जबकि असल में उसे 310 एमएल तेल कम मिल रहा है।

देसी घी: अब एक किलो के बजाय 800 ग्राम की पैकिंग भी बाजार में आ गई है, जिसका दाम कम दिखाकर ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है। बाजार भाव पर एक नजर (रिटेल रेट)उत्पादपैकिंगरिटेल रेट (अनुमानित)रिफाइंड तेल600 एमएल115 - 120 रुपये700 - 750 एमएल130 - 140 रुपये910 एमएल160 - 170 रुपयेदेसी घी800 ग्राम400 - 450 रुपये1 किलो530 - 650 रुपयेस्टैंडर्ड पैकिंग के नियम हुए खत्मकारोबारियों का कहना है कि पहले उत्पादों की स्टैंडर्ड पैकिंग होती थी, जिससे वजन बराबर रहता था। अब कंपनियां प्रति यूनिट बिक्री मूल्य के आधार पर मनमर्जी की पैकिंग बना रही हैं।

फिलहाल केवल सरकारी राशन डिपो में ही एक किलो की स्टैंडर्ड पैकिंग मिल रही है।भीलवाड़ा हलचल न्यूज पोर्टल पर अपनी खबर देने के लिए संपर्क करें:समाचार: प्रेम कुमार गढवाल 9413376078 (Email: [email protected], व्हाट्सएप: 9829041455)विज्ञापन: विजय गढवाल 6377364129संपर्क कार्यालय: भीलवाड़ा हलचल, कलेक्ट्री रोड, नई शाम की सब्जी मंडी, भीलवाड़ा। फोन: 7737741455


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