सावधान! असली जैसे दिखने वाले इन 'फर्जी' कॉल से खाली हो सकते हैं आपके खाते

इन दिनों साइबर ठगों ने आम जनता की गाढ़ी कमाई लूटने के लिए 'कॉल स्पूफिंग' जैसी खतरनाक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। आपकी मोबाइल स्क्रीन पर बैंक, पुलिस स्टेशन, सीबीआई या आरबीआई का असली दिखने वाला नंबर फ्लैश होता है, लेकिन हकीकत में इसके पीछे कोई अधिकारी नहीं बल्कि शातिर अपराधी होता है।
क्या है कॉल स्पूफिंग और कैसे फंसते हैं लोग?
कॉल स्पूफिंग तकनीक में इंटरनेट कॉलिंग और विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए कॉलर आईडी को बदल दिया जाता है। इससे पीड़ित को लगता है कि उसे किसी सरकारी संस्थान या विश्वसनीय विभाग से फोन आया है।
डर का खेल: ठग डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी अपडेट, कार्ड ब्लॉक, इनकम टैक्स रेड या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोपों का डर दिखाते हैं।
मानसिक दबाव: वीडियो कॉल पर नकली पुलिस थाना या दफ्तर दिखाकर पीड़ित को मानसिक रूप से तोड़ा जाता है और जल्दबाजी में पैसा ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव:
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, अब अंतरराष्ट्रीय नंबरों की जगह स्थानीय नंबरों का उपयोग हो रहा है, जिससे भरोसा जीतना आसान हो जाता है। ठगी से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
किसी भी कॉल पर अपना CVV, पासवर्ड या बैंक डिटेल साझा न करें।
धमकाने वाले कॉल आने पर तुरंत फोन काट दें और आधिकारिक हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
कॉलर आईडी ऐप पर पूरी तरह भरोसा न करें क्योंकि ठग तकनीक से उसे भी चकमा दे देते हैं।
ठगी होने पर क्या करें?
यदि आपको ठगी की आशंका हो या आप शिकार हो जाएं, तो बिना समय गंवाए साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और अपने बैंक को तुरंत सूचित कर खाता फ्रीज करवाएं।
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