सीएम डॉ. मोहनलाल यादव बोले: सनातन की रक्षा को जात-पात से ऊपर उठे समाज, 2028 उज्जैन महाकुंभ का दिया न्योता
भीलवाड़ा (मूलचन्द पेसवानी)। धर्मनगरी भीलवाड़ा स्थित हरी सेवा धाम में आयोजित सनातन मंगल महोत्सव का आज वैदिक रीति-विधि के साथ भव्य समापन हुआ। तीन संतों की दीक्षा और नामकरण संस्कार के साथ पूरा पंडाल “हर-हर महादेव” और “जय श्रीराम” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। देशभर से पधारे संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
समापन समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहनलाल यादव, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेश नाथ, राज्य के सहकारिता मंत्री गौतम दक तथा भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। संतों की दीक्षा के पश्चात नामकरण संस्कार में इंद्रदेव को संत ईशान राम, कुणाल को संत केशव राम तथा सिद्धार्थ को संत सूयज्ञ राम उदासी नाम प्रदान किया गया। नाम उच्चारण के साथ ही श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहनलाल यादव ने कहा कि वर्तमान समय में सनातन धर्म की रक्षा और उसके गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए समाज को जाति-पांति से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद जिस प्रकार अयोध्या में प्रभु श्रीराम का धाम पुनः आलोकित हुआ है, उसी प्रकार आने वाले समय में मथुरा में भी श्रीकृष्ण धाम विश्व पटल पर नई पहचान बनाएगा।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सभी देवस्थलों को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। वर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले महाकुंभ का उल्लेख करते हुए उन्होंने सभी संतों और श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया और कहा कि इस महाकुंभ में नवाचार के साथ सनातन की नई चेतना का संचार होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज विश्वभर में सनातन संस्कृति की पताका लहरा रही है। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि “राज से राजस्थान और मैं से मध्य प्रदेश, दोनों मिलकर ही राम बनता है”, जो राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समन्वय का संदेश देता है। उन्होंने तीनों नवदीक्षित संतों का शाल ओढ़ाकर व माल्यार्पण कर अभिनंदन किया।
इससे पूर्व हरी सेवा उदासीन आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराज महाराज ने सभी संतों और अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भीलवाड़ा में आयोजित इस सनातन महोत्सव ने जो मुकाम हासिल किया है, वह पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि सनातन की जो ध्वजा यहां से फहराई गई है, उसे अक्षुण्ण बनाए रखने की जिम्मेदारी हम सभी की है। “संत सदैव देने वाला होता है, लेने वाला कभी संत नहीं हो सकता” — उनके इन शब्दों पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा।
राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेश नाथ महाराज ने भी समाज से सनातन परंपरा और राष्ट्रहित में संगठित होकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक है।
समापन अवसर पर कासनिक पीठाधीश्वर गुरु शरणानंद महाराज, शांतानंद जी महाराज, विवेकानंद जी महाराज, कपिल मुनि महाराज, भगवत स्वरूप महाराज, हितेश आनंद महाराज, महेंद्र लक्ष्मण दास त्यागी, बाबू गिरी महाराज, मोहन शरण शास्त्री, बनवारी शरण, गोपाल दास महाराज, रामदास रामायणी, रामस्नेही संत दिग्विजय राम, कथा वाचक डॉ. श्याम सुंदर पाराशर, शकरगढ़ के जगदीश पुरी जी महाराज सहित सैकड़ों संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्ज्वलन और आशीर्वचनों के बीच सम्पन्न हुआ यह सनातन मंगल महोत्सव भीलवाड़ा के धार्मिक इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि सनातन केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है—जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी संस्कार, सेवा और समर्पण से जीवित रखा जाता
