नरेगा में बदलाव के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल: कलेक्ट्रेट पर 'मनरेगा बचाओ महासंग्राम' में उमड़ा जनसैलाब

नरेगा में बदलाव के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल: कलेक्ट्रेट पर मनरेगा बचाओ महासंग्राम में उमड़ा जनसैलाब
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भीलवाड़ा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली 'मनरेगा' योजना के अस्तित्व को बचाने के लिए बुधवार को भीलवाड़ा में कांग्रेस ने हुंकार भरी। जिला कांग्रेस कमेटी (देहात) के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री रामलाल जाट के नेतृत्व में जिला कलेक्ट्री पर "मनरेगा बचाओ महासंग्राम" के तहत विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन में जिले के कोने-कोने से आए हजारों मजदूरों, किसानों और नरेगा मेटों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

बीजेपी राज में मजदूरों का बुरा हाल: रामलाल जाट



धरने को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष रामलाल जाट ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्वरूप में किए जा रहे बदलावों को 'गरीब विरोधी' करार दिया। उन्होंने विस्तार से निम्नलिखित बिंदु रखे:

नाम बदलना केवल भ्रम: जाट ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन' (ग्रामीण) कर दिया है। बीजेपी केवल नाम बदलकर जनता को भ्रमित कर रही है, जबकि धरातल पर योजना को कमजोर किया जा रहा है।

काम के दिनों का छलावा: उन्होंने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार का हवाला देते हुए कहा कि पहले मजदूरों को 125 दिन का गारंटीड काम मिलता था, लेकिन अब बीजेपी राज में मजदूरों का औसत मात्र 45 दिन रह गया है। 125 दिन का वादा केवल कागजों तक सीमित है।

बकाया मजदूरी और ब्याज की मांग: जाट ने गंभीर आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिला है। उन्होंने मांग की कि जैसे सरकारी कर्मचारियों को महीने के अंत में वेतन मिलता है, वैसे ही मजदूरों को हफ्ता भरते ही भुगतान मिले। यदि भुगतान में देरी होती है, तो सरकार को उस पर ब्याज देना चाहिए।

अधिकारों का हनन: फसल कटाई के समय 2 माह मनरेगा बंद करने के फैसले पर उन्होंने कहा कि यह अधिकार ग्राम पंचायतों के पास होना चाहिए, क्योंकि हर प्रदेश में फसल का समय अलग-अलग होता है।

आर्थिक मंदी और महंगाई की चेतावनी

कांग्रेस नेता ओम नारानीवाल ने अपने संबोधन में आगाह किया कि मनरेगा केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण बाजार की धड़कन है। यदि गांवों में पैसा नहीं पहुंचेगा, तो शहरों के बाजार भी प्रभावित होंगे, जिससे देश के आर्थिक हालात खराब होंगे और महंगाई और बढ़ेगी।

राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

धरने के समापन के बाद कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन' (ग्रामीण) विधेयक को तत्काल वापस लिया जाए और मनरेगा को उसके मूल संवैधानिक स्वरूप में बहाल किया जाए।

कार्यक्रम के दौरान एक संगठनात्मक घोषणा भी हुई। पूर्व जिला प्रमुख सुशीला सालवी को जिला कांग्रेस कमेटी महिला (देहात) के अध्यक्ष पद पर मनोनीत किया गया, जिनका रामलाल जाट और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।

ये दिग्गज रहे मौजूद



प्रदर्शन में अक्षय त्रिपाठी, कैलाश व्यास, हंगामी लाल मेवाड़ा, राजेन्द्र त्रिवेदी, रणदीप त्रिवेदी, गोवर्धन गुर्जर, शंकर लाल गाडरी, चेतन पेसवानी, महेश सोनी, ईश्वर खोईवाल, मधु जाजू, हेमेन्द्र शर्मा, आशीषराजथला सहित जिले के सभी पूर्व विधायक, विधायक प्रत्याशी, पीसीसी सदस्य, और ब्लॉक/मण्डल के पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन महेश सोनी ने किया।

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