11 मार्च को बुझे रहेंगे रसोई के चूल्हे:: शीतला अष्टमी और कालाष्टमी का दुर्लभ संयोग, भीलवाड़ा में बासोड़ा और रंगों की तैयारी

भीलवाड़ा । आगामी 11 मार्च 2026 की तारीख अपने कैलेंडर में अभी से मार्क कर लीजिए, क्योंकि उस दिन आपकी रसोई का चूल्हा पूरी तरह बंद रहेगा। सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन इस दिन ताजा गर्म खाना आपकी सेहत बिगाड़ सकता है, जबकि एक रात पहले का बना बासी खाना शरीर के लिए अमृत की तरह काम करेगा।
शीतला अष्टमी और कालाष्टमी का अद्भुत संगम
साल 2026 में 11 मार्च को एक अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन 'शीतला अष्टमी' (बासोड़ा) और 'चैत्र कालाष्टमी' दोनों एक साथ पड़ रही हैं। हिंदू धर्म में शीतला माता को चेचक, खसरा और त्वचा रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है, वहीं भगवान काल भैरव नकारात्मक ऊर्जा और भय का नाश करते हैं। इन दोनों शक्तियों की आराधना का एक ही दिन होना आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है।
बासी खाना क्यों बनेगा अमृत?
शीतला अष्टमी के दिन 'बासोड़ा' मनाने की प्राचीन परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन मां शीतला को ठंडे पकवानों जैसे मीठे चावल, दही, राबड़ी और ओळिया का भोग लगाया जाता है।
धार्मिक मान्यता: इस दिन चूल्हा जलाना वर्जित माना गया है, परिवार माता को अर्पित शीतला प्रसाद (बासी भोजन) ही ग्रहण करता है।
वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण: होली के बाद मौसम तेजी से बदलता है और शरीर में पित्त व गर्मी बढ़ने लगती है। आयुर्वेद के अनुसार, इस संक्रमण काल में ठंडा और हल्का भोजन करने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है और बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
भीलवाड़ा में रंगों की मस्ती का रहेगा जोर
वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में इस दिन का उत्साह दोगुना रहता है। यहाँ शीतला अष्टमी पर खाने-पीने के साथ-साथ जमकर रंग खेलने की भी परंपरा है। शहर के युवाओं ने अभी से इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। टोली बनाकर रंग खेलने और बासोड़ा उत्सव मनाने का उल्लास भीलवाड़ा की गलियों में अभी से महसूस किया जा सकता है।
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