तिरुपति महाप्रभु के करोड़ों भक्तों से धोखा, मंदिर ट्रस्ट को बेच डाली 6800000 किलो नकली घी, ₹250 करोड़ का चूना

नई दिल्ली। तिरूपति मंदिर से जुड़े लड्डू विवाद में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. एक डेयरी जिसने कभी दूध या बटर (मक्खन) का एक कतरा भी नहीं खरीदा, उसने तिरुपति मंदिर ट्रस्ट या तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को 60 महीने यानी 5 साल में 68 लाख किलोग्राम घी की सप्लाई कर दी. CBI की जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है. मिलावटी घी से पवित्र लड्डू बनाने के मामले की जांच के दौरान यह बात सामने आई है. सीबीआई के इस खुलासे से कई सवाल उठने लगे हैं. सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि TTD में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी कि महीनों से चले आ रहे करोड़ों रुपये के इस महाघोटाले का समय रहते पता लगाया जा सके. बता दें कि तिरुपति मंदिर के पवित्र लड्डू को प्रसाद के तौर पर लखों-करोड़ों भक्त खरीदते हैं.
TTD (आंध्र प्रदेश के विख्यात तिरुपति मंदिर का संचालन करने वाला ट्रस्ट) में लड्डू प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी में भारी स्तर पर मिलावट का बड़ा घोटाला सामने आया है. सीबीआई की विशेष जांच टीम (SIT) की जांच में पता चला है कि उत्तराखंड की एक डेयरी ने 2019 से 2024 के बीच 68 लाख किलोग्राम घी की सप्लाई TTD को की, जिसकी कीमत लगभग 250 करोड़ रुपये थी. चौंकाने वाली बात यह है कि वह डेयरी किसी भी स्रोत से न तो दूध खरीदती थी और न ही मक्खन.
गजब का अपनाया ट्रिक
CBI के अनुसार, हरिद्वार जिले के भगवाणपुर में स्थित भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के प्रमोटर पामिल जैन और विपिन जैन ने एक फर्जी देसी घी उत्पादन यूनिट खड़ी की. उन्होंने दूध और मक्खन की खरीद से संबंधित दस्तावेज़ फर्जी तरीके से बनाए और पेमेंट रिकॉर्ड्स में हेरफेर किया, ताकि यह दिखाया जा सके कि घी का उत्पादन नियमित रूप से हो रहा है. जांच में गिरफ्तार किए गए आरोपी अजय कुमार सुगंध ने SIT को जानकारी दी कि वह डेयरी को मोनोडाइग्लिसराइड्स (monodiglycerides) और एसेटिक एसिड एस्टर जैसे केमिकल सप्लाई करता था. ये रसायन औद्योगिक और खाद्य मिलावट में उपयोग होते हैं और घी में बनावट व स्थिरता बढ़ाने के लिए मिलाए जाते थे.
