पंचायत चुनाव की घोषणा में देरी से ग्रामीण राजनीति में उबाल, उम्मीदवारों की बढ़ी धड़कनें

पंचायत चुनाव की घोषणा में देरी से ग्रामीण राजनीति में उबाल, उम्मीदवारों की बढ़ी धड़कनें
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भीलवाड़ा। जिले के ग्रामीण इलाकों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की धुरी माने जाने वाले पंचायत चुनाव की घोषणा का इंतजार अब उम्मीदवारों और मतदाताओं के लिए भारी असमंजस का सबब बनता जा रहा है। करीब एक माह से अधिक समय से चुनाव तारीखों की प्रतीक्षा में बैठे संभावित प्रत्याशी कभी अपनी तैयारी को तेज कर रहे हैं तो कभी यह उत्साह ठंडा पड़ता नजर आ रहा है। चुनावी तारीखों के ऐलान में हो रही देरी ने सरपंच और पंचायत समिति सदस्य पद के दावेदारों की बेचैनी बढ़ा दी है।

पंचायती राज चुनाव मूल रूप से पिछले साल जनवरी 2025 में प्रस्तावित थे, लेकिन प्रशासनिक तैयारियों, आरक्षण प्रक्रिया और विभिन्न कानूनी अड़चनों के चलते इसमें लगातार विलंब होता चला गया। राहत की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में परिसीमन से जुड़ी एक याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे चुनाव कराने का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। हालांकि ओबीसी आरक्षण, परिसीमन और वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देने जैसे तकनीकी मुद्दों के कारण घोषणा में अब भी वक्त लग रहा है। जिले के सभी उपखंडों में आरक्षण लॉटरी का बेसब्री से इंतजार हो रहा है ताकि प्रत्याशी अपनी जीत की ठोस रणनीति बना सकें।

गांवों की चाय की थड़ियों और चौपालों पर इन दिनों चुनावी गपशप का दौर चरम पर है। यहां सरपंच पद के दावेदार और उनके समर्थक रोजाना जमा होकर तारीखों की अटकलों पर चर्चा करते देखे जा सकते हैं। स्थानीय निवासी छोटू जाट, सम्पत माली, रामलाल और गणेश जाट ने बताया कि चुनाव की तारीखों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कभी लगता है कि चुनाव जल्द होंगे तो तैयारी तेज कर देते हैं, लेकिन देरी होने पर माहौल फिर से शांत हो जाता है। वर्तमान सरपंचों का कार्यकाल समाप्त होने और प्रशासकों की नियुक्ति होने से ग्रामीण विकास के कार्यों पर भी असर पड़ रहा है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि राजनीतिक स्थिरता और सरकारी प्राथमिकताओं के चलते ही इस बार ग्रामीण सरकार के गठन में इतना लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

कब लागू हो सकती है आचार संहिता ?

माना जा रहा है कि मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद मार्च के प्रथम सप्ताह में प्रदेश में चुनाव की आचार संहिता लागू हो जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का लगातार रुख स्पष्ट है कि पंचायत और निकाय चुनाव समय पर कराए जाएं। इसी के तहत चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है।

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