विश्व युद्ध की आहट: ईरान पर 'बड़ी लहर' हमले की तैयारी में ट्रंप, ब्रिटेन के एयरबेस पर पहुंचे अमेरिकी स्टील्थ बमवर्षक

विश्व युद्ध की आहट: ईरान पर बड़ी लहर हमले की तैयारी में ट्रंप, ब्रिटेन के एयरबेस पर पहुंचे अमेरिकी स्टील्थ बमवर्षक
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नई दिल्ली/वॉशिंगटन । मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को "बड़ा हमला" या "बड़ी लहर" की चेतावनी देने के ठीक बाद, अमेरिकी वायुसेना के सबसे घातक बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षक विमानों के ब्रिटेन और हिंद महासागर स्थित सैन्य ठिकानों पर पहुंचने की खबरें तेज हो गई हैं। युद्ध के सातवें दिन ट्रंप ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा, "हमने अभी तक उन पर कड़े प्रहार शुरू भी नहीं किए हैं, बड़ी लहर जल्द आने वाली है।"

ब्रिटेन ने दी बेस इस्तेमाल की अनुमति

मीडिया रिपोर्ट्स (द टेलीग्राफ और फॉक्स न्यूज) के अनुसार, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने पहले अमेरिकी अनुरोध को ठुकरा दिया था। हालांकि, ईरान द्वारा हाल ही में किए गए बड़े मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद, ब्रिटेन ने सीमित रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए अपने एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है।

प्रमुख ठिकाने: बी-2 बमवर्षक जल्द ही ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोल्ड और हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया बेस पर उतर सकते हैं।

रणनीति: इन ठिकानों का उपयोग ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल साइटों को नष्ट करने के लिए अमेरिका-इजरायल संयुक्त अभियान के तहत किया जाएगा।

दुनिया का सबसे महंगा और घातक विमान: बी-2 स्पिरिट

ईरान के खिलाफ मोर्चे पर तैनात होने जा रहा बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षक दुनिया का सबसे महंगा विमान है, जिसकी कीमत प्रति विमान लगभग 2 अरब डॉलर (करीब 16,000 करोड़ रुपये) है। यह विमान रडार की नजर में आए बिना दुश्मन के इलाके में घुसकर भारी बमबारी करने में सक्षम है। ट्रंप की "बड़ी लहर" वाली चेतावनी इन्हीं विमानों के जरिए ईरानी परमाणु ठिकानों और मिसाइल डिपो पर हमले की ओर इशारा कर रही है।

युद्ध का सातवां दिन: तनाव चरम पर

इजराइल और अमेरिका के ईरान पर लगातार हमलों के बीच खाड़ी देशों में भी डर का माहौल है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ईरान पर हमले और तेज करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बी-2 बमवर्षकों ने उड़ान भरी, तो यह युद्ध पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ेगा।

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