यहाँ अमीर हो या गरीब सबका बिस्तर एक:: लेकिन नेता समझे न जिम्मेदार, मोक्ष स्थल के विकास पर भेदभाव

लेकिन नेता समझे न जिम्मेदार, मोक्ष स्थल के विकास पर भेदभाव

भीलवाड़ा। शमशान तेरा हिसाब बड़ा ही नेक है, तेरे यहाँ अमीर हो या गरीब सबका बिस्तर एक है ! लेकिन ये बात ना नेताओ को समझ आ रही है और ना ही जिम्मेदार नौकरशाहों को, क्योकि मोक्ष स्थल के साथ भी विकास में भेदभाव किया जा रहा है। अजीब विडम्बना है की एक से दो किलोमीटर की दूरी पर एक ही रोड पर बने दो अलग-अलग मोक्ष धाम पर अपनी अंतिम यात्रा पूरी कर 'अर्थी' पहुंचती है तो संस्कार में शामिल होने आए लोगो को विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड रहा है।

राजीव गाँधी रिंग रोड पर कोठारी नदी पर बन रहे नए पुल के नीचे नदी किनारे स्तिथ मुक्तिधाम श्मशान घाट पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। मोक्षधाम श्मशान घाट की हालत काफी दयनीय है। ना पीने के पानी की व्यवस्था है और ना दाह संस्कार के समय के दौरान बैठने की। वहीँ करीब दो किलोमीटर दूर टंकी के बालाजी के पास बने मोक्ष धाम में सब सुविधाए है। यहां परेशानी यह है की भीषण गर्मी, बारिश के मौसम में विजय सिंह पथिक नगर, आरसी व्यास कॉलोनी के कुछ हिस्से में रहने वाले लोग अपने परिजन की अंतिम यात्रा को दूर तक लेकर जाना पड रहा है, जबकि उनके नजदीक बांगड़ अस्पताल के पीछे एक मोक्ष धाम है, लेकिन अनदेखी कहे या रसूखदारों को लाभ पहुंचाने की नियत से उक्त स्थल का विकास तो दूर, कई समय से सुध तक नहीं ली जा रही है।

नदी पार बस रही आबादी

कोठारी नदी के बीच नई पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है, कहते है की कुछ ही वर्षो में नदिया के उस पार भी कॉलोनियां बनेगी जहाँ एक बड़ी आबादी निवास करने वाली है। लेकिन लापरवाही के चलते इस जिम्मेदार इस मोक्ष धाम का अस्तित्व ख़त्म करने पर तुले है। आस पास के लोगो का तो यहाँ तक कहना है की यहां उजाड़ कर दिया जाये तो कोई परिजन यहाँ आने के बजाए आगे वाले मोक्ष धाम पर जाना ही उचित समझेंगे। ऐसे में धीरे धीरे यह स्थल लुप्त हो जायेगा और सामने बसने वाली कॉलोनियो के भावो में भी इसका असर पड़ेगा।

क्षतिग्रस्त सराय, हादसों को न्योता

श्मशान घाट पर बनी सराय की हालत इतनी खराब व जर्जर है कि यहां शवदाह करने के बाद अंतिम क्रिया तक रुकने वाले लोगों के बैठने तक की जगह नहीं है, जर्जर भवन के कारण डर सताता रहता है कि कहीं छत उनके ऊपर न गिर जाए। कई सालों से इमारत की मरम्मत नहीं होने से छत से सीमेंट का मलबा गिर रहा है। फर्श टूटी है और जानवरो द्वारा इतनी गंदगी फैला रखी है की बैठना तो दूर यहाँ दो खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है। साथ ही, दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ जाने से कभी भी हादसे का भय बना रहता है। खासकर बारिश के दिनों में स्थिति और भी दयनीय हो जाती है। खानापूर्ति के नाम पर वहां सीमेंट की कुछ टेबल लगा रखी है, जहाँ धुप और दाह की अग्नि के बीच बैठ पाना भी मुश्किल है।

लाईट फिटिंग के अंदर जम रहे जाले

अंतिम संस्कार के बाद पूरी प्रक्रिया के दौरान कई बार अँधेरा हो जाता है ऐसे में श्मशान घाट पर रात के समय में रोशनी की व्यवस्था तक नहीं है। यहाँ सराय के अंदर लाइट समन्धि उपक्रम ढूंढने पर भी नहीं मिलता है। बहुत ध्यान से देखने पर पता चलता है की सराय की सीलिंग में अंडरग्राउण्ड लाइट फिटिंग हो रखी है। फिटिंग के हर पॉइंट पर जाले जमे हुए है, जो एहसास कराते या तो लाइट लगाईं ही नहीं गई, अगर लगाई तो चोरी हो चुकी है। ऊपर से नदी का क्षेत्र होने से लोगों की परेशानी और भी ज्यादा बढ़ जाती है, जीव जन्तुओ का भी डर बना रहता है।

सफाई का अभाव, उग रहीं झाड़ियां, पानी तक नहीं

शहर के आरसी व्यास, विजय सिंह पथिक नगर क्षेत्र के लोगो के लिए बने इस श्मशान घाट पर साफ-सफाई का अभाव भी नजर आ रहा है। श्मशान घाट के चारोें ओर झाड़ियां उग रहीं हैं। यहां अंतिम संस्कार के दौरान लोगों के न तो बैठने की कोई उचित व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की व्यवस्था है। इससे अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोग पास से पानी की बोतल या फिर केन पर निर्भर रहते है।

दो किलोमीटर पर सर्वसुविधा युक्त श्मशान घाट

एक तरफ कोठारी नदी पर बन रहे पल के पास स्तिथ इस मोक्ष धाम से आगे इसी रोड पर बीजेपी कर्यालय के सामने टंकी के बालाजी के पास बना श्मशान घाट सर्वसुविधा युक्त है। यहाँ विकास के लिए हर वक्त कुछ ना कुछ काम चलता रहता है। मंगलवार को भी रंग रोगन और सफाई का काम चालू था। पानी की भी व्यवस्था यहाँ ठीक है।

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