अनाज का सुरक्षित भण्ड़ारण कर बढ़ाये आमदनी -डॉ. यादव

अनाज का सुरक्षित भण्ड़ारण कर बढ़ाये आमदनी -डॉ. यादव
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भीलवाड़ा। कृषि विज्ञान केन्द्र शाहपुुरा पर अनुसंधान निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा प्रायोजित अनुसूचित जाति उपयोजनान्तर्गत एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण एवं आदान वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सी. एम. यादव ने केन्द्र की गतिविधियों से अवगत करवाते हुए अनाज का सुरक्षित भण्ड़ारण कर आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया। डॉ. यादव ने बताया कि भारत की बढ़ती आबादी को देखते हुए अनाज के सुरक्षित भण्ड़ारण के साथ-साथ जनसंख्या नियन्त्रण भी आवश्यक है।

डॉ. यादव ने अनाज भण्ड़ारण से पूर्व की तैयारी एवं भण्ड़ारण के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. राजेश जलवानियाँ, सह आचार्य उद्यानिकी ने अनाज के भण्ड़ारण के साथ-साथ मातृवृक्ष बगीचे का रेखांकन, कोल्ड स्टोरेज की आवश्यकता एवं महत्त्व के बारे में तकनीकी जानकारी दी। डॉ. एच. एल. बुगालिया, सहायक आचार्य पशुपालन ने अनाज को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ों एवं जीवों के बारे में जानकारी देते हुए उनके प्रभावी रोकथाम के उपाय बताये। फार्म मैनेजर गोपाल लाल टेपन से अनाज का भण्ड़ारण करते समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया। तकनीकी सहायक हेमलता मीणा ने डेयरी एवं खाद्य विज्ञान महाविद्यालय, उदयपुर के अधिष्ठाता डॉ. लोकेश गुप्ता का आभार जताया कि लघु एवं सीमान्त किसानों के उत्थान हेतु अनुसूचित जाति योजनान्तर्गत तीन क्विंटल अनाज भण्ड़ारण कोठियाँ उपलब्ध करवाई। सणगारी के सरपंच भागचन्द चाड़ा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सभी का आभार जताया। प्रशिक्षण में अनुसूचित जाति के 30 कृषकों को तीन क्विंटल भराव क्षमता वाली कोठियों का वितरण किया गया।

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