भीलवाड़ा में द्वितीय सस्वर सवा लाख अखंड हनुमान चालीसा पठन का भव्य आयोजन

भीलवाड़ा में द्वितीय सस्वर सवा लाख अखंड हनुमान चालीसा पठन का भव्य आयोजन
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भीलवाड़ा। भीलवाड़ा शहर में दूसरी बार अद्वितीय और अनूठा सस्वर सवा लाख अखंड हनुमान चालीसा पठन का आयोजन किया जा रहा है। यह 14 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान 3 जनवरी से 16 जनवरी तक पेच के बालाजी, बालाजी मार्केट में आयोजित हो रहा है। आयोजन सर्वजन कल्याण की कामना और श्री हनुमान जी की कृपा प्राप्ति के उद्देश्य से किया जा रहा है।

इस पावन अनुष्ठान का शुभारंभ 3 जनवरी को विद्वान 108 पंडितों द्वारा किया गया। इसके अंतर्गत प्रतिदिन 81 पंडित सामूहिक रूप से प्रातः 9 बजे से सायं 6 बजे तक 121 हनुमान चालीसा पाठ कर रहे हैं। प्रत्येक पाठ के साथ श्री हनुमान जी महाराज को नैवेद्य स्वरूप फल अर्पित किया जा रहा है, जिससे पाठों की विधिवत गणना भी की जा रही है। शेष समय में 27 पंडित बारी-बारी से संगीतमय हनुमान चालीसा पाठ कर रहे हैं।

इस आयोजन में शहर की ख्यातनाम भजन मंडलियां एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं, जिससे पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।

गौरतलब है कि इससे पूर्व इसी प्रकार का अनुष्ठान अयोध्या नगरी में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के उपरांत नूतन श्रीरामलला मूर्ति प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर किया गया था। वह आयोजन 7 जनवरी 2024 से 25 जनवरी 2024 तक 19 दिवसीय रहा, जबकि श्रीरामलला की मूर्ति प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को संपन्न हुई थी। उस समय यह संकल्प संपूर्ण आयोजन के निर्विघ्न पूर्ण होने की कामना के साथ लिया गया था।

हनुमान चालीसा के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया गया कि इसका सर्वप्रथम वाचन 16वीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा किया गया था, जिसकी पुष्टि सिद्धि साखी गौरी सा के माध्यम से भगवान शंकर और माता पार्वती द्वारा मानी जाती है।

इन दोनों अनुष्ठानों के आयोजक जानकी लाल, करुणा देवी, राहुल, श्वेता एवं समस्त भूरालाल सुवालका परिवार हैं। आचार्य के रूप में बनारस के विद्वान पंडित सच्चिदानंद झा अनुष्ठान का मार्गदर्शन कर रहे हैं। आयोजन की सफलता में बजरंग मंदिर ट्रस्ट बालाजी मंदिर के समस्त भक्तगण एवं मंदिर के महंत पंडित आशुतोष शर्मा का विशेष सहयोग रहा है।

इस अनूठे धार्मिक आयोजन को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष अनिल कुमार मानसिंहका द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं।

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