मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका आलस्य-मुनि आदित्यसागर

भीलवाडा 14 जनवरी। मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका आलस्य है। प्रमादी व्यक्ति के जीवन में सुख और सुकून नही होता है क्योंकि वह तो किसी कार्य को प्रारम्भ ही नही कर पाता है। व्यक्ति जैसा पुरुषार्थ करेगा, वैसी ही उसको फल की प्राप्ति होगी। जो लक्ष्य प्राप्त करना है उसके लिए शुरुआत करो। स्फूर्ति के साथ अपने जीवन की दिशा का निर्धारण करो, दिशा निर्धारण के लिए अपने विवेक और बुद्धि को पूर्ण जाग्रत कर निर्णय लो। यह बात मुनि आदित्यसागर महाराज ने तरण ताल परिसर में बुधवार को प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि काल का कोई भरोसा नही है। हर जीव का अपना-अपना आयु कर्म का बंध करके आता है। आचार्य कुन्दकुन्द देव की आयु 98 वर्ष थी लेकिन भगवान महावीर की आयु तो तीर्थंकर होने के बावजूद भी 72 वर्ष ही थी। अतः कोई बात कल पर मत छोड़ो।

अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि 17 से 19 जनवरी 2026 के दौरान तीन दिवसीय भक्तामर विधान आराधना के पात्रों का चयन बोली के माध्यम से प्रातः कालीन धर्म सभा में किया गया। शांतिलाल शाह, विकास सेठी, महेन्द्र सेठी ने सौधर्म इन्द्र का पुर्ण्याजन किया।

ओमचन्द रिखबचन्द बाकलीवाल परिवार, संजय झांझरी, विकास सेठी ने कुबेर, शुभम काला, पारस चौधरी, नरेश गोधा ने चक्रवर्ती, अभिषेक पाटनी, राजेश विनायका, राकेश पहाड़िया ने बाहुबलि के पात्र बने। सुभाष सेठी 18 जनवरी के लिए यज्ञनायक बने। विधान के प्रारम्भ में झण्डारोहण का पुर्ण्याजन चान्दबाई, नरेश, नितिन, पीयूष गोधा ने प्राप्त किया।

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