जसवंतपुरा विद्यालय बना मौत का जाल, जर्जर भवन गिरने की कगार पर, प्रशासन बेखबर

बैरा भेरूलाल गुर्जर . बनेड़ा उपखंड क्षेत्र की बेरा ग्राम पंचायत स्थित जसवंतपुरा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की हालत भयावह होती जा रही है। जर्जर भवन, गिरता प्लास्टर, बरसात का पानी कक्षाओं में भरा होना और चारों तरफ दलदल जैसे हालात बच्चों की जान पर सीधा खतरा बन चुके हैं। बावजूद इसके, अधिकारियों को बार बार सूचना देने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
शुक्रवार को सरपंच प्रतिनिधि सुवालाल गुर्जर, विद्यालय प्रबंधन समिति अध्यक्ष महावीर सिंह और कई ग्रामीण अचानक निरीक्षण के लिए विद्यालय पहुंचे तो हालात देखकर सभी हैरान रह गए। विद्यालय परिसर तालाब में तब्दील हो चुका था। बच्चों के बैठने तक की जगह नहीं बची है। भवन के पीछे स्थित धर्म तालाब का पानी रिसाव के जरिए विद्यालय की नींव में जा रहा है, जिससे पूरी इमारत कमजोर होती जा रही है।
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि स्कूल की छतों से प्लास्टर झड़ रहा है, दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और जमीन धंसने जैसी स्थिति बनने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत या नए भवन की स्वीकृति नहीं दी गई तो कोई भी बड़ा हादसा कभी भी हो सकता है।
सरपंच प्रतिनिधि सुवालाल गुर्जर ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और अन्य उच्च अधिकारियों को पहले ही अवगत करा दिया गया था, लेकिन अब तक किसी स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई। शुक्रवार को जब ग्रामीण विद्यालय पहुंचे तो प्रधानाचार्य ने भी साफ शब्दों में कहा कि भवन की हालत बेहद खराब है और कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह विद्यालय अधिकांश रूप से भामाशाहों के सहयोग से बना था। सरकार की ओर से केवल तीन कमरे बनाए गए थे। इसके बाद वर्षों बीत जाने के बावजूद किसी जनप्रतिनिधि या विभाग ने भवन की मरम्मत या विस्तार को लेकर कोई पहल नहीं की। वर्तमान में इस विद्यालय में करीब 130 छात्र छात्राएं अध्ययनरत हैं, जो रोज जान जोखिम में डालकर कक्षाओं में बैठने को मजबूर हैं।
विद्यालय प्रबंधन समिति अध्यक्ष महावीर सिंह ने बताया कि ग्रामीण कई बार शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को लिखित शिकायत दे चुके हैं, लेकिन लापरवाही जस की तस बनी हुई है। परिसर की सभी 11 कक्षाओं की नींव कमजोर हो चुकी है और पूरा भवन संरचनात्मक रूप से सुरक्षित नहीं है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द नए भवन की स्वीकृति नहीं दी गई और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। निरीक्षण के दौरान किशनलाल माली, राजूलाल सुथार, राजूलाल माली, नानूराम, लादूलाल माली, दुर्गालाल, रतनलाल माली, विमल रेगर, सीमा शायरी, भेरूलाल, सुवालाल, रामप्रसाद सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे और सभी ने एक स्वर में प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग उठाई।
