मिडिल क्लास पर बढ़ता टैक्स बोझ, सिस्टम में बदलाव की मांग तेज

भीलवाड़ा । देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले मध्यम वर्ग पर टैक्स और महंगाई का दोहरा दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष आम करदाताओं ने लगभग 11 लाख करोड़ रुपये आयकर के रूप में चुकाए, जबकि बड़े कॉरपोरेट घरानों का योगदान करीब 9.8 लाख करोड़ रुपये रहा। इन आंकड़ों ने कर व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
इस मुद्दे को लेकर उपभोक्ता अधिकार समिति, राजस्थान भीलवाड़ा इकाई ने वित्त मंत्रालय को ज्ञापन भेजकर टैक्स सिस्टम में व्यापक सुधार की मांग की है। समिति के केंद्रीय मानवाधिकार अध्यक्ष डॉ. अशोक सोडाणी ने कहा कि मध्यम वर्ग लगातार महंगाई की मार झेल रहा है। पिछले एक वर्ष में बच्चों की शिक्षा लगभग 8 प्रतिशत, मकान किराया 7 प्रतिशत, स्वास्थ्य सेवाएं 9 प्रतिशत, भोजन 6 प्रतिशत और दैनिक आवागमन 5 प्रतिशत तक महंगा हुआ है।
डॉ. सोडाणी ने कहा कि मध्यम वर्ग न तो गरीबों की तरह सरकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ ले पाता है और न ही संपन्न वर्ग की तरह कर छूट प्राप्त कर पाता है। आम आदमी की आय का बड़ा हिस्सा टैक्स में चला जाता है, जबकि बदले में अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलतीं।
समिति के अनुसार एडवोकेट प्रहलाद राय व्यास, केंद्रीय अध्यक्ष सुनील राठी और केंद्रीय महिला अध्यक्ष मधु जाजू के नेतृत्व में संगठन पिछले तीन दशकों से उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिए सक्रिय है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि कर ढांचे को संतुलित और न्यायसंगत नहीं बनाया गया तो आर्थिक प्रगति के दावे खोखले साबित हो सकते हैं।
