खुलासा: यूआईटी लॉटरी में भ्रष्टाचार का 'महाखेल', अपनों को रेवड़ी की तरह बांटे बेशकीमती भूखंड

खुलासा: यूआईटी लॉटरी में भ्रष्टाचार का महाखेल, अपनों को रेवड़ी की तरह बांटे बेशकीमती भूखंड
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​भीलवाडा। नगर विकास न्यास (UIT) भीलवाड़ा की 3081 भूखंडों की ऑनलाइन लॉटरी में पारदर्शिता के नाम पर जो खेल खेला गया, उसका अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। एसीबी की गोपनीय जांच रिपोर्ट ने न्यास के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्ट में सीधे तौर पर सचिव ललित गोयल, लॉटरी प्रभारी रविश श्रीवास्तव और जेडीए प्रोग्रामर कुलदीप जैन पर तकनीकी छेड़छाड़ कर धांधली करने के संगीन आरोप लगाए गए हैं।

​तकनीकी सेंधमारी: चहेतों के लिए 'फिक्स' थी लॉटरी!

​एसीबी प्रथम यूनिट के उप अधीक्षक पारस मल की रिपोर्ट के मुताबिक, यूआईटी के अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ऑनलाइन सिस्टम में ऐसा 'सॉफ्टवेयर खेल' किया कि मनचाहे प्लॉट चहेतों की झोली में जा गिरे। रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिस लैपटॉप से लॉटरी संचालित की गई, उसे नियमानुसार किसी थर्ड पार्टी से जांच करवाकर मौके पर सील करना था, लेकिन सबूत मिटाने या गड़बड़ी छिपाने के लिए ऐसा नहीं किया गया।

​भ्रष्टाचार की 'पारिवारिक' लिस्ट: साहब के बेटे और भाई तक को मिला प्लॉट

​जांच रिपोर्ट में उन नामों का खुलासा हुआ है जिन्हें नियम ताक पर रखकर लाभ पहुंचाया गया:

​गोपाल तोतला (प्रशासनिक अधिकारी): पुत्र एवं भाई के नाम भूखंड।

​वीणा अग्रवाल (उप विधि परामर्शी): पति के नाम भूखंड।

​जितेश शर्मा (प्रशासनिक अधिकारी): स्वयं के नाम भूखंड।

​इंजीनियर्स का भी जलवा: एईएन रोहन अजमेरा और शक्ति सिंह के नाम भी आवंटन।

​एक ही घर में तीन-तीन लॉटरी, 'किस्मत' या 'कमीशन'?

​रिपोर्ट के अनुसार, राजेश लढ्ढा के परिवार पर यूआईटी की 'विशेष कृपा' बरसी। पत्नी माया लढ्ढा, पुत्र दिनेश और स्वयं राजेश के नाम अलग-अलग योजनाओं (पंचवटी और पटेलनगर) में भूखंड आवंटित हो गए। इसी तरह राजेंद्र सिंह पीपाड़ा और उनकी पत्नी अनिता को भी एपीजे अब्दुल कलाम नगर में भूखंड मिल गए। क्या यह महज इत्तेफाक है या सुनियोजित भ्रष्टाचार?

​एसीबी का चाबुक: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(C), 12 एवं 13(1)(a) के तहत इसे प्रथम दृष्टया अपराध माना गया है और विस्तृत जांच की अनुशंसा की गई है।

​सचिव का पल्ला झाड़ने वाला जवाब

​जब इस पूरे मामले पर यूआईटी सचिव ललित गोयल से सवाल हुआ, तो उन्होंने साफ़ कह दिया— "हमने अपना जवाब नगरीय विकास विभाग को भेज दिया है। जांच कमेटी की जानकारी नहीं है, हमारी प्राथमिकता अभी असफल आवेदकों का रिफंड करना है।"

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