कांचीपुरम सोसायटी में सजी आस्था और परंपरा की रंगीन छटा, गीतों-नृत्य से गूंजा माहौल

भीलवाड़ा। सुहाग और सौभाग्य के पावन पर्व गणगौर पर कांचीपुरम सोसायटी इस वर्ष पूरी तरह रंग, उमंग और परंपरा के रंग में रंगी नजर आई। चैत्र शुक्ल तृतीया के अवसर पर महिलाओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ गणगौर महोत्सव मनाते हुए समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।
सुबह से ही सोसायटी में उत्सवी माहौल बन गया था। पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी महिलाओं ने इसर जी और गणगौर माता की मनोहारी सवारी निकाली। ढोल-बाजों की थाप और “गोर गवर गोमती…” जैसे मधुर राजस्थानी लोकगीतों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण हो उठा। महिलाओं ने नृत्य और गीतों के माध्यम से अपनी आस्था, प्रेम और परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का सफल संयोजन सरोज कोगटा, रेणु राठी एवं नीता जैन द्वारा किया गया, जिनके नेतृत्व में आयोजन ने भव्यता प्राप्त की। आयोजन में महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने इसे और भी खास बना दिया।
इस अवसर पर मधु कोगटा, द्रोपदी मानसिंह, रितु अग्रवाल, उषा अग्रवाल, भावना राठी, कृष्णा लड्ढा, अनुष्का मुंद्रा, अनिता विजयवर्गीय, संतोष शर्मा, अल्का झवर, किरण शर्मा, मधुरिमा रस्तोगी, अल्का गोखरू, चित्रा कोठारी सहित अनेक महिलाओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
अंत में सभी महिलाओं ने एक-दूसरे को गणगौर की शुभकामनाएं देते हुए अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का भी सुंदर उदाहरण प्रस्तुत कर गया।
