भीलवाड़ा की 10 पंचायतों को मिली नई पहचान, नगर निगम से बाहर होकर फिर पंचायत समिति में शामिल

भीलवाड़ा की 10 पंचायतों को मिली नई पहचान, नगर निगम से बाहर होकर फिर पंचायत समिति में शामिल
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भीलवाड़ा। जिले में लंबे समय से असमंजस की स्थिति झेल रहीं 10 ग्राम पंचायतों को आखिरकार स्पष्ट प्रशासनिक पहचान मिल गई है। पंचायत पुनर्गठन के बाद इन पंचायतों को नगर निगम के दायरे से बाहर कर पुनः पंचायत समिति क्षेत्र में शामिल कर दिया गया है। इससे न केवल ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है, बल्कि जिले की पंचायती राज व्यवस्था का नक्शा भी बदला है।

पुनर्गठन के तहत पांसल, मालोला, आरजिया, पालड़ी, सिदड़ीयास, भोली, हलेड़, सुवाणा, आटूण और गठीलखेड़ा ग्राम पंचायतों को नगर निगम से अलग किया गया है। अब ये सभी पंचायतें पंचायत समिति क्षेत्र में शामिल होंगी। इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों का प्रशासनिक दायरा बढ़ा है और ग्राम पंचायतों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।

दरअसल, बीते वर्षों में इन पंचायतों को कभी नगर निगम में शामिल किया गया तो कभी वापस पंचायत क्षेत्र में लाया गया। इसके साथ ही खजूरी और फूलियाकलां में नई पंचायत समितियों के गठन और पंचायतों के विभाजन से स्थिति और अधिक उलझ गई थी। इससे ग्रामीणों में लगातार असमंजस और नाराजगी बनी हुई थी।

अब शासन स्तर पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीण पहले से ही इन पंचायतों को नगर निगम में शामिल किए जाने का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि नगर निगम में जाने से गांवों की मूल पहचान खत्म होती है और पंचायती राज व्यवस्था कमजोर पड़ती है। इसी मांग को लेकर ग्रामीणों ने कई बार जिला कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपे थे।

इन दस पंचायतों में शामिल राजस्व गांव इस प्रकार हैं। पांसल पंचायत में पांसल, मालोला पंचायत में मालोला और जोधड़ास, आरजिया पंचायत में आरजिया, केशवपुरा, जाटों का खेड़ा और सोलबीघा, पालड़ी पंचायत में पालड़ी, देवखेड़ी, गोविंदपुरा, तेलीखेड़ा और इंद्रपुरा शामिल हैं। सिदड़ीयास पंचायत में सिदड़ीयास, आकोला और साकरिया खेड़ा, भोली पंचायत में भोली, सालरिया, चोयलों का खेड़ा, कचोलिया, माधोपुर और दांताजती शामिल किए गए हैं। इसी तरह हलेड़ पंचायत में हलेड़ और सबलपुरा, सुवाणा पंचायत में सुवाणा और नई ईरास, आटूण पंचायत में आटूण, ठगों का खेड़ा और हजारी खेड़ा तथा गठीलखेड़ा पंचायत में गठीलखेड़ा और बीड़ का खेड़ा शामिल हैं।

प्रशासनिक स्पष्टता के इस फैसले से अब ग्रामीण विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है और पंचायत स्तर पर योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का रास्ता भी साफ हुआ है।

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