भीलवाड़ा के डॉक्टर की फर्जी आईडी का इस्तेमाल करने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 12 करोड़ के सिलिकोसिस फर्जीवाड़े में 2 डॉक्टर और 1 रेडियोग्राफर जेल में

भीलवाड़ा/भीलवाड़ा हलचल न्यूज पोर्टल। दौसा में हुए करोड़ों रुपए के सिलिकोसिस प्रमाण पत्र फर्जीवाड़े में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस बहुचर्चित ईएसएम फर्जीवाड़े में भीलवाड़ा और नाथद्वारा के डॉक्टरों की आईडी का दुरुपयोग किया गया था। भीलवाड़ा के डॉक्टर विजय की फर्जी आईडी का उपयोग करने वाले इस गिरोह के मास्टरमाइंड डॉ. मनोज ऊंचवाल को अब पुलिस ने धर दबोचा है। उसके साथ एक अन्य डॉक्टर और एक रेडियोग्राफर को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इन तीनों ने मिलकर 413 फर्जी सिलिकोसिस सर्टिफिकेट जारी कर सरकार को 12.39 करोड़ रुपए का चूना लगाया था।
साइबर थाना प्रभारी बृजेश ने बताया कि सोमवार 30 मार्च 2026 की शाम करीब 7 बजे चेस्ट-टीबी कनिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. मनोज ऊंचवाल, मेडिसिन प्रमुख विशेषज्ञ डॉ. डीएन शर्मा और रेडियोग्राफर मनोहर लाल को गिरफ्तार किया गया। कोर्ट के आदेश पर इन सभी को जेल भेज दिया गया है। इनके खिलाफ दौसा में 29 जनवरी 2024 को शिकायत दर्ज करवाई गई थी। भीलवाड़ा के डॉक्टर विजय की आईडी का फर्जीवाड़े में उपयोग करने के मामले में पहले ही एक ई-मित्र संचालक सहित दो लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन मुख्य सरगना डॉ. मनोज ऊंचवाल अब पुलिस के हत्थे चढ़ा है।
गौरतलब है कि दौसा जिले में महज 10 महीने के भीतर 2453 सिलिकोसिस कार्ड बनाए गए थे। इतनी बड़ी संख्या पर शक होने पर सरकार ने एक जांच कमेटी गठित की। कमेटी की रिपोर्ट में चौंकाने वाला सच सामने आया कि पूरे प्रदेश में जारी हुए सर्टिफिकेट में से 45% अकेले दौसा में जारी हुए थे। इस पूरे फर्जीवाड़े में प्रदेश भर के 22 कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई थी, जिनमें से अकेले 13 लोग दौसा जिले के थे।
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