शक्करगढ़ पंचायत क्षेत्र में गंदगी का अंबार, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा – सरपंच बोली “2 बार पंचायत समिति को लिखित में आदेश मांगा फिर भी आदेश नहीं”

शक्करगढ़ । शक्करगढ़ पंचायत क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। पंचायत और ठेकेदार की लापरवाही के कारण गांवों में गंदगी का साम्राज्य फैल गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरकार के मंत्री हर जगह ढिंढोरा पीटते है की पंचायतो को हर साल लाखों रुपये सफाई के लिए मिलते हैं, लेकिन गांवों में न तो झाड़ू लगती है और न ही नालियों की सफाई होती है।
बरसात के मौसम में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई गांवों में कीचड़ से रास्ते बंद हो गए हैं। खेजड़या, माली की झोपड़िया , जोजर, बृज की ढुंगरी सहित आस पास के अन्य छोटे मजरों और गावो में सफाई नही होने से आमजन के सामने कीचड़ और गंदगी समस्या बनकर खड़ी है नालियां बजबजा रही हैं, मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और कई बच्चे डेंगू व वायरल बुखार से बीमार पड़ रहे हैं।
सरपंच मनभर देवी ने कहा कि “अगस्त माह में हमने दो बार विकास अधिकारी, जहाजपुर को लिखित में साफ-सफाई के लिए सेक्शन निकालने और ठेकेदार को निर्देश देने की मांग की थी, लेकिन आज तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ पंचायत भी असहाय महसूस कर रही है।”
ग्रामीणों का दर्द:
“पिछले कई महीनों से सफाई कर्मचारी नहीं दिखे। पंचायत को बार-बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”
“गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। महिलाएं पानी भरने के लिए गंदगी से होकर गुजरती हैं।”
“सरकार कहती है गांवों में सफाई पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हम गंदगी में रहने को मजबूर हैं।”
खेजड़या गांव की स्थिति सबसे खराब:
शक्करगढ़–बाकरा सड़क से खेजड़या गांव तक जाते ही कीचड़ से सड़क और गली दोनों पूरी तरह बंद जैसी लगती हैं। लोग फिसलकर गिर रहे हैं, बाइक और ट्रैक्टर कीचड़ में धंस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई सालों से इस समस्या की शिकायत हो रही है लेकिन न ठेकेदार आता है न सफाई कर्मचारी।
प्रशासन को अल्टीमेटम:
ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से फैसला लिया है कि यदि 7 दिन के भीतर सफाई शुरू नहीं हुई तो वे पंचायत भवन पर ताला लगाकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि इस बार वे फोटो और वीडियो सबूतों के साथ जिला कलेक्टर और पंचायती राज मंत्री को शिकायत भेजेंगे ताकि कार्रवाई टाली न जा सके।
स्वास्थ्य संकट का खतरा:
गंदगी और कीचड़ के कारण गांवों में बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग को भी चेताया है कि यदि समय रहते सफाई नहीं हुई और बीमारी फैलने पर जान-माल का नुकसान हुआ तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
