गंगापुर में दो दिवसीय विहंगम योग उत्सव, 2100 कुंडीय महायज्ञ से गूंजी आध्यात्मिक धारा

गंगापुर दिनेश लक्षकार। विहंगम योग अनुयायियों के लिए 14 और 15 फरवरी 2026 को गंगापुर में दो दिवसीय आध्यात्मिक उत्सव का आयोजन हुआ। अवसर था प्रथम परंपरा सदगुरु देव आचार्य श्री धर्मचंद्र देव जी महाराज की 107वीं जयंती का, जिसे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।
समारोह का प्रमुख आकर्षण 2100 कुंडीय विश्व शांति वैदिक महायज्ञ रहा, जो विश्व कल्याण और शांति की कामना के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत स्वर्वेद शोभा यात्रा से हुई, जिसने नगर की सड़कों पर भक्ति की लहर प्रवाहित कर दी। स्वर्वेद कथामृत और अमृतवाणी के माध्यम से श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक संदेश ग्रहण किए।
संत प्रवर विज्ञान देव महाराज ने स्वर्वेद कथा के माध्यम से बताया कि वाराणसी में बन रहा स्वर्वेद महामंदिर धाम लाखों जीवों को मुक्ति पथ की ओर अग्रसर करने का केंद्र बनेगा। वर्तमान सदगुरु देव आचार्य स्वतंत्र देव महाराज की अमृतवाणी ने श्रद्धालुओं को आत्मिक एकता और समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सभी एक दूसरे के हैं और आध्यात्मिक साधना ही सच्ची शांति का मार्ग है।
गंगापुर विहंगम योग परंपरा के लिए विशेष महत्व रखता है। यहाँ सदगुरुदेव आचार्य धर्मचंद्र देव महाराज की साधना स्थली के रूप में इसे जाना जाता है। विहंगम योग संस्थान ब्रह्मविद्या की प्राचीन परंपरा को साधना, सत्संग और सेवा के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है।
कार्यक्रम में विहंगम योग मेवाड़ गंगापुर के कैलाश चंद्र पारिक ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। राजस्थान संत समाज के महामंत्री सुरेश शर्मा ने देश के विभिन्न राज्यों से आए भक्तों का स्वागत किया। आयोजन में हरीओम दाधीच, देवेंद्र जोशी, राकेश बाफना, छोटू लाल माली, कन्हैयालाल जैन, विद्यासागर पंचोली, रमेश कुमावत, कैलाश शर्मा, राजेश गोखरू, राजू तेली, कल्याण मल कुम्हार, सत्यनारायण लक्षकार सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर सद्गुरु देव भगवान ने सभी के कल्याण की कामना करते हुए विहंगम योग की क्रियात्मक साधना, सेवा और सत्संग से जुड़ने का आह्वान किया। दो दिवसीय यह आयोजन गंगापुर को आध्यात्मिक चेतना के केंद्र के रूप में स्थापित कर गया।
