वारदात: चोरी और लूट के 4 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली, ग्रामीणों में भारी आक्रोश ​


​शम्भूगढ़। थाना क्षेत्र के गांगलास गांव में कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई है। लाखों की चोरी और एक ग्रामीण के साथ मारपीट कर लूट की वारदात को अंजाम दिए हुए चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक अंधेरे में तीर चला रही है। चोरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने न केवल घरों के ताले तोड़े, बल्कि विरोध करने पर हिंसा का सहारा भी लिया।

​वारदात का तरीका: फिल्मी अंदाज में दी चुनौती

​जानकारियों के अनुसार, चोरों ने पूरी योजना के साथ गांगलास गांव में एक दुकान और घर को निशाना बनाया।

​बंधक बनाया: चोरों ने सबसे पहले घर के सभी कमरों को बाहर से बंद कर दिया ताकि कोई बाहर न आ सके।

​लूट और मारपीट: वारदात के दौरान जब एक जागरूक ग्रामीण ने शोर मचाया या विरोध करने की कोशिश की, तो शातिर चोरों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। घायल ग्रामीण के गले से सोने की मादलिया और कानों से सोने की मुरकियां झपटकर चोर रफूचक्कर हो गए।

​दुकान में सेंधमारी: चोरों ने दुकान के ताले तोड़कर करीब 5 हजार रुपए नकद, दो जोड़ी जूते, एक घड़ी और एक गुल्लक सहित अन्य घरेलू सामान पर हाथ साफ कर दिया। अलमारी के लॉकर तक को तोड़कर सामान खंगाला गया।

​शम्भूगढ़ पुलिस की 'सुस्ती' पर उठे सवाल

​घटना के 96 घंटे बीत जाने के बावजूद शम्भूगढ़ पुलिस न तो चोरों का सुराग लगा पाई है और न ही लूटे गए जेवर बरामद कर सकी है। पुलिस की इस विफलता से गांगलास सहित आसपास के गांवों में डर और नाराजगी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की गश्त (Patrolling) के अभाव में अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं।

​ग्रामीणों की मांग: सुरक्षा नहीं तो आंदोलन

​बढ़ती चोरी की घटनाओं से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त लहजे में मांग की है:

​नियमित गश्त: क्षेत्र में रात के समय पुलिस की गश्त बढ़ाई जाए।

​जल्द गिरफ्तारी: इस मामले के दोषियों को जल्द पकड़कर माल बरामद किया जाए।

​सुरक्षा की गारंटी: जान-माल की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम हों।

​ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, तो वे आंदोलन की राह अपनाने को मजबूर होंगे

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