टोलप्लाजा प्रबंधन के वि‍रोध में ग्रामीणों ने कलेक्‍ट्रेट पर क‍िया प्रदर्शन, कलेक्‍टर को सौंपा मांग पत्र, दी आन्‍दोलन की चेतावनी

टोलप्लाजा प्रबंधन के वि‍रोध में ग्रामीणों ने कलेक्‍ट्रेट पर क‍िया प्रदर्शन,  कलेक्‍टर को सौंपा मांग पत्र, दी आन्‍दोलन की चेतावनी

भीलवाड़ा (पुनित चपलोत)। जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर आज मुजरास, गुरंला, कोचरिया, रगसपुरिया, काबरा खेड़ा, सुन्दरपुरा गांवों के ग्रामीणो ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया प्रदर्शन के बाद उन्होंने जिला कलेक्टर नमित मेहता को 6 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौपा । जिसमें उन्होंने NH 758 पर स्थित मुजरास टोलप्लाजा के प्रबंधन द्वारा टोल के नियमों के विपरित किये जा रहे कार्यों के विरोध कार्यवाही करने की मांग की हैं ।वहीं उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 5 दिन में कोई कार्यवाही नहीं की गयी तो सभी ग्रामवासियान द्वारा उग्र आंदोलन किया जावेगा जिसकी तमाम जिम्मेदारी प्रशासन की होगी ।

प्रदर्शनकर्ता सरपंच श्रवण गुर्जर ने कहा कि मुजरास, गुरंला, कोचरिया, रगसपुरिया, काबरा खेड़ा, सुन्दरपुरा गांवों के ग्रामीणो ने कलेक्ट्री पहुंचकर जिला कलेक्टर को 6 सुत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया है जिसमें हमारी प्रमुख मांग है कि मुजरास टोल प्रबंधन राजमार्ग से सुचारू संचालन व व्यवस्थाओं के लिए है लेकिन राजमार्ग पर जहां-जहां रोशनी के प्वाईंट है वहां पर लाईटे अक्सर बंद रहती है जिसके कारण कल एक व्यक्ति घुमाव पर बिना रिफ्‌लेक्टर और बिना लाईट के चालू होने से दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उससे उसकी मृत्यु हो गयी । दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के बाद मुजरास टोल पर फोन किया गया लेकिन लापरवाही से दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की मौके पर मृत्यु हो जाने के बाद एंबूलेंस उपलब्ध करवायी गयी । उनके विरूद्ध मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिये । उनके कारण प्रतिदिन दुर्घटनाओं में लोगों की मृत्यु हो रही है। रोड की साईड पर जितनी मिट्टी होनी, चाहिये उतनी मिट्टी नहीं है जिससे दुपहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं । रोड के दोनों तरफ प्रोपर मिट्टी नहीं होने और गहरी खाईयां टोलकर्मियों द्वारा कर देने से भी दुर्घटनायें हो रही है, इतना ही नहीं नियमों के अनुसार टोल मार्ग के दोनों तरफ वृक्षारोपण होना चाहिये लेकिन टोल को आरम्भ हुए करीबन 10 वर्ष हो गये और उन 10 वर्षों ने टोल प्रबंधन व ठेकेदारों ने आज दिन तक एक भी वृक्ष जीवित नहीं रखा है पशुओं से सुरक्षा के प्रबंध नहीं है, इतना ही नहीं इतने लम्बे मार्ग पर गाडरमाला चौराहा से गुरंला तक पशुओं के निकलने के लिए कोई अण्डरपास नहीं है जो कि मूल रूप से पारित नक्शे में स्वीकृत थे परन्तु जानबूझकर उन्हें बनाया नहीं गया । इसके अलावा पूरे राजमार्ग के दोनों तरफ सीमांकित क्षेत्र में एक भी ऐसा वृक्ष नहीं है जिसकी आयु 10 वर्ष हो टोलप्रबंधन एनजीटी को गलत अभिलेख पेश कर रहा है और एनजीटी में झूठे शपथपत्र दे रहा है इसके संबंध में एनजीटी में अलग से कार्यवाही की जायेगी क्योंकि एनजीटी में दिखाये गये वृक्षों की मोके पर उपलब्धता आवश्यक है । जब ग्रामीणों द्वारा वृक्षारोपण व पशुओं के अण्डरपास की बात की जाती है तो झूठे मुकदमे दर्ज करवा दिये जाते हैं और तंग परेशान किया जाता है और किसी भी लावारिस एक्सीडेंट का दायित्व उक्त गांवों के कृषकों के वाहनों पर डालने का प्रयास किया जाता है।

गांवों के लोगों को खुले आम यह धमकी दे रहा है कि अण्डरपास या एनजीटी के संबंध में बात करोगे तो झूठे मुकदमे दर्ज करायेगें । यह है कि रोड के दोनों तरफ जो नाले बना रखे है उन पर ढक्कन नहीं लगाकर खुले छोड़ रखे है जिनमें आये दिन स्कूल में पढने वाले छोटे बच्चे व पशु गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं यह है कि राजष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के दौरान जो-जो मुख्य बिन्दू उच्च श्रेणी की लाईटों के लिए थे वहां से टोल प्रबंधन ने लाईटे खोलकर बेच दी । यह है कि इसके अलावा भी उक्त राजमार्ग पर टोलप्रबंधन द्वारा कई अन्य अनियमितता हो रखी है जिनके लिए बिन्दूवाद जांच के दौरान निवेदन किया जावेगा एवं माननीय उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जाने वाली रिट याचिका में भी उल्लेख किया जायेगा । यह है कि मुजरास टोल प्लाजा जो कि राजमार्ग संख्या 758 पर अवस्थित है के दोनों तरफ काश्तकारों के खेत हैं जिनमें काश्तकार एक दूसरे गांवों में कृषि भूमि पर सिजारे से खेती करते हैं और स्वयं के भी खेत है जिनसे उनको दिन में कई बार आना-जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में काश्तकार व उनके परिचित अन्य लोग भी आते-जाते हैं परन्तु स्थानीय लोगों व काश्तकारों को टोलकर्मी नियमविरूद्ध तरीके से टोल वसूलते हैं जो कि विधि विरूद्ध है । एवं टोल के आस-पास दोनों तरफ काश्तकारों के खेतों पर आने-जाने के लिए वर्षों पुराने मार्ग हैं जिनको टोलकर्मी जेसीबी से खड्डे करवाकर अवरूद्ध कर देते हैं जिससे अंधेरे में उन खड्डों में मवेशी आदि भी गिरते रहते हैं और ऐसा करने से रोकने के लिए जब कहा जाता है तो झूठे मुकदमा दर्ज करवा दिये जाते हैं जिससे मुजरास टोल के आस-पास के ग्रामीण काफी परेशान है। यदि 5 दिन के भीतर हमारी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो ग्रामीणों द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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