कांग्रेस के नए जिलाध्यक्ष के नाम तय, दिल्ली में मैराथन मीटिंग में हुआ फैसला

कांग्रेस के नए जिलाध्यक्ष के नाम तय, दिल्ली में मैराथन मीटिंग में हुआ फैसला
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जयपुर । कांग्रेस में राहुल गांधी के फॉर्मूले के आधार पर चल रहे संगठन सृजन अभियान के तहत राजस्थान के 50 में से 48 जिलों में जिलाध्यक्षों के पैनल पर मंथन पूरा हो गया है. दिल्ली में केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर रंधावा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के साथ सभी पैनल पर चर्चा की. अब संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल व राहुल गांधी के बीच अंतिम दौर की वार्ता के बाद अगले कुछ दिनों में नए जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी जाएगी.

राजस्थान में कांग्रेस के नए जिलाध्यक्षों की घोषणा का काउंटडाउन शुरू हो गया है. 50 में से 48 जिलाध्यक्षों के लिए मंथन का आखिरी चरण चल रहा है. अंता विधानसभा में उपचुनाव के चलते बारां व झालावाड़ जिलों के लिए नाम बाद में तय होंगे. शुक्रवार को नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय पर संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर रंधावा के साथ पर्यवेक्षकों द्वारा भेजे गए पैनल पर विस्तृत चर्चा की गई. इसके बाद पहले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और बाद में पीसीस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से हर जिले के दावेदारों पर चर्चा की गई. कांग्रेस नेता भंवर जितेंद्र सिंह, हरीश चौधरी, सह प्रभारी ऋतविक मकवाना व चिरंजीवी राव से भी चर्चा की गई.

हालांकि भंवर जितेंद्र ने वेणुगोपाल व रंधावा को महज दस सैकंड में अपनी बात रखते हुए कहा कि वे किसी का भी नाम नहीं लेंगे, जो पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर आलाकमान तय करेगा, वही फैसला सभी को मंजूर होगा. जिलाध्यक्षों की चयन की प्रक्रिया इस महीने के शुरुआत में शुरू हुई थी, जब आलाकमान द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों ने प्रत्येक जिले में करीब एक सप्ताह तक रायशुमारी की थी. इस दौरान कुछ जिलों में गुटबाजी भी नजर आई और विवाद भी हुआ, लेकिन पर्यवेक्षकों ने हर जिले से छह छह दावेदारों के पैनल तैयार किए.

इस पैनल पर फिर केसी वेणुगोपाल ने रंधावा, डोटासरा व जूली सहित अन्य नेताओं से चर्चा की. गोविंद डोटासरा व जूली ने प्रत्येक जिले पर अपनी राय रखी और पैनल में आए दावेदारों के नाम पर फीडबैक दिया. साथ ही क्षेत्रीय व जातिगत समीकरण से भी अवगत कराया. अब राहुल गांधी की मंजूरी के बाद फाइनल नाम तैयार होंगे. इस बात की संभावना है कि अंतिम मुहर लगाने से पहले राहुल गांधी की टीम द्वारा पैनल पर एक क्विक सर्वे भी कराया जाएगा.

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