लोन गारंटर बनना कितना जोखिम भरा, साइन करने से पहले जरूर समझें जिम्मेदारी और कानूनी असर

लोन गारंटर बनना कितना जोखिम भरा, साइन करने से पहले जरूर समझें जिम्मेदारी और कानूनी असर
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अगर आपके किसी दोस्त, रिश्तेदार या परिचित को लोन की जरूरत पड़े और वह आपसे गारंटर बनने की गुजारिश करे, तो अक्सर लोग भावनाओं में आकर तुरंत हां कह देते हैं। अधिकतर को लगता है कि बस कागजों पर साइन करने हैं और कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

लोन गारंटर बनना सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़ी वित्तीय और कानूनी जिम्मेदारी होती है। अगर उधार लेने वाला व्यक्ति समय पर EMI नहीं चुकाता है तो इसका सीधा असर गारंटर पर पड़ता है। बैंक या फाइनेंशियल कंपनी आपसे रकम वसूल सकती है और आपका क्रेडिट स्कोर भी गिर सकता है, जिससे भविष्य में आपको खुद लोन लेने में परेशानी हो सकती है।

इसी को लेकर आज आपका पैसा कॉलम में हम समझ रहे हैं कि लोन गारंटर कौन होता है, उसकी क्या जिम्मेदारियां होती हैं, किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है और जरूरत पड़ने पर गारंटर लिस्ट से नाम हटवाने के क्या तरीके हो सकते हैं। इस विषय पर देहरादून के फाइनेंशियल एक्सपर्ट राजशेखर ने अहम जानकारियां साझा की हैं।

लोन गारंटर बनने का क्या मतलब है

फाइनेंशियल एक्सपर्ट CAअमित मेहता के अनुसार, लोन गारंटर वह व्यक्ति होता है जो किसी और के लिए लिए गए लोन की कानूनी गारंटी देता है। इसका मतलब यह है कि अगर उधार लेने वाला व्यक्ति किसी भी कारण से लोन की किश्तें नहीं चुका पाता, तो बैंक या वित्तीय संस्था उस रकम की वसूली सीधे गारंटर से कर सकती है। कानूनन गारंटर को पूरी बकाया राशि चुकानी पड़ सकती है, चाहे उसने खुद वह पैसा इस्तेमाल न किया हो।

कौन बन सकता है लोन गारंटर

कोई भी व्यक्ति तब तक गारंटर बन सकता है, जब तक वह बैंक की तय शर्तों और पात्रता को पूरा करता हो। गारंटर बनने वाले व्यक्ति की भी क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होनी चाहिए। यानी उसका क्रेडिट स्कोर अच्छा हो, इनकम स्थिर हो और पहले से ज्यादा लोन या बकाया न हो। आमतौर पर बैंक परिवार के करीबी सदस्यों जैसे माता पिता, भाई बहन या जीवनसाथी को ही गारंटर के रूप में स्वीकार करना पसंद करते हैं।

गारंटर की प्रमुख जिम्मेदारियां

गारंटर बनने का मतलब है कि आप उस लोन की अदायगी के लिए बराबर जिम्मेदार हैं। अगर उधारकर्ता लगातार किश्तें नहीं देता तो बैंक पहले उसे नोटिस भेजता है, लेकिन भुगतान न होने की स्थिति में आपसे संपर्क किया जा सकता है। आपके खिलाफ भी रिकवरी प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसके अलावा अगर मामला अदालत तक पहुंचता है तो उसमें भी गारंटर को पक्षकार बनाया जा सकता है।

क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ता है

अगर उधार लेने वाला समय पर EMI नहीं देता है, तो उसका असर आपके क्रेडिट रिकॉर्ड पर भी दर्ज हो जाता है। इससे आपका सिबिल या अन्य क्रेडिट स्कोर गिर सकता है। कमजोर स्कोर होने पर भविष्य में आपको खुद होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लेने में दिक्कत आ सकती है या ज्यादा ब्याज देना पड़ सकता है।

गारंटर बनने से पहले किन बातों पर ध्यान दें

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी के लिए गारंटर बनने से पहले उसकी वित्तीय स्थिति जरूर जांच लें। यह समझें कि उसकी आमदनी स्थिर है या नहीं और वह पहले किसी लोन की किश्त तो नहीं चूक चुका है। लोन की राशि, अवधि और EMI कितनी है, इसकी पूरी जानकारी लें। यह भी पढ़ें कि अगर डिफॉल्ट होता है तो बैंक किन शर्तों के तहत आपसे वसूली कर सकता है। बिना दस्तावेज पूरी तरह पढ़े कभी भी साइन न करें।

गारंटर लिस्ट से नाम कैसे हटवाया जा सकता है

आमतौर पर एक बार गारंटर बनने के बाद आपका नाम तब तक जुड़ा रहता है, जब तक लोन पूरी तरह चुका नहीं दिया जाता। हालांकि कुछ मामलों में बैंक दूसरे गारंटर की व्यवस्था होने पर पुराने गारंटर को हटाने की अनुमति दे सकता है। इसके लिए उधार लेने वाले को आवेदन करना होता है और नए गारंटर की पात्रता जांची जाती है। लोन रीपेमेंट का अच्छा रिकॉर्ड होने पर भी बैंक इस पर विचार कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला पूरी तरह बैंक पर निर्भर करता है।

कुल मिलाकर विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि भावनाओं में आकर तुरंत गारंटर न बनें। यह फैसला सोच समझकर लें, क्योंकि किसी और की आर्थिक लापरवाही का बोझ आखिरकार आपको उठाना पड़ सकता है।

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