शादी के सीजन में सिलेंडर का 'संकट', फीकी पड़ सकती है दावतों की रंगत

शादी के सीजन में सिलेंडर का संकट, फीकी पड़ सकती है दावतों की रंगत
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शादियों की शहनाइयां गूंजने के साथ ही अब रसोई का बजट और व्यवस्थाएं डगमगाने लगी हैं। गैस सिलेंडर को लेकर मचे हाहाकार ने सबसे ज्यादा कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों की नींद उड़ा दी है। हालात यह हैं कि अब शादी के मेनू में कटौती करने की नौबत आ गई है, ताकि सीमित संसाधनों में मेहमानों का स्वागत किया जा सके।

मेनू में कटौती की तैयारी, मेहमानों को मिलेंगे चुनिंदा पकवान

शहर के गार्डन और होटलों में 22 मार्च तक की भारी बुकिंग है। जिन आयोजनों में एक हजार या उससे अधिक मेहमानों को आमंत्रित किया गया है, वहां सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कैटरर्स अब ऐसे व्यंजनों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जिनमें कम गैस की खपत हो। हलवाइयों और कैटरिंग संचालकों का कहना है कि अगर सिलेंडर की किल्लत इसी तरह जारी रही, तो मेनू से कुछ खास पकवानों को हटाना मजबूरी बन जाएगा।

डीजल भट्टी और इंडक्शन बने सहारा

संकट के इस दौर में होटल और कैटरिंग व्यवसायियों को पारंपरिक गैस चूल्हों के बजाय वैकल्पिक साधनों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। अब शादियों के पंडालों में डीजल भट्टी, इंडक्शन और इंफ्रारेड इलेक्ट्रिक कॉइल का इस्तेमाल बढ़ता दिख रहा है। हालांकि, बिजली की खपत और वैकल्पिक ईंधन के खर्च ने संचालकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

> विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार शादियों में 'लाइव काउंटर' कम नजर आ सकते हैं, क्योंकि वहां गैस की खपत सबसे ज्यादा होती है।

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