“संस्कार और संस्कृति का केंद्र बनेगा महाविद्यालय” – उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा

भीलवाड़ा,। युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। भीलवाड़ा जिले के माण्डल में 7.29 करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्मित राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय का भव्य लोकार्पण मंगलवार को प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा द्वारा किया गया।
संस्कार और आधुनिकता का संगम
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री डॉ. बैरवा ने कहा कि यह महाविद्यालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि क्षेत्र में भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के संरक्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा, "इस संस्थान की स्थापना से स्थानीय युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए अब दूर नहीं जाना पड़ेगा। संस्कृत शिक्षा के माध्यम से हम अपनी जड़ों से जुड़ सकेंगे।"
वरिष्ठ अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और वरिष्ठ जनप्रतिनिधि सतीश पूनिया ने संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी बताते हुए "जयतु भारतम्, जयतु संस्कृतम्" का नारा दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में संस्कृत का प्रचार-प्रसार समय की मांग है। इस अवसर पर माण्डल विधायक , अटरु विधायक राधेश्याम बैरवा, और प्रशांत मेवाड़ा सहित कई प्रशासनिक अधिकारी एवं स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आधुनिक सुविधाओं से लैस नया परिसर
सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा DMFT योजना के अंतर्गत निर्मित यह दो मंजिला भवन अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है:
शैक्षणिक कक्ष: कुल 13 बड़े और हवादार कमरे (7 भूतल पर, 6 प्रथम मंजिल पर)।
हाई-टेक लाइब्रेरी: प्रथम मंजिल पर एक आधुनिक पुस्तकालय और स्टाफ रूम।
प्रशासनिक ब्लॉक: प्राचार्य कक्ष, स्थापना शाखा, लेखा शाखा और कंप्यूटर लैब।
अन्य सुविधाएं: परिसर में छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय, सुंदर बगीचा और विशाल पार्किंग एरिया विकसित किया गया है।
इस महाविद्यालय के शुरू होने से माण्डल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। विधायक ने इसे क्षेत्र के शैक्षिक विकास की दिशा में एक 'मील का पत्थर' करार दिया।
