सन्नाटे' में गूंजी 'जय झूलेलाल': दुकानें बंद, फिर भी उल्लास का 'महाकुंभ'!
भीलवाडा। सिंधी समाज के आराध्य भगवान झूलेलाल के 1077वें अवतरण दिवस पर भीलवाड़ा जिला मुख्यालय के साथ-साथ शाहपुरा, आसींद और जिले के अन्य हिस्सों में भी चेटीचंड महोत्सव का भव्य और अभूतपूर्व समापन हुआ।
शुक्रवार को समाज की दुकानों के पूरी तरह बंद रहने से शहर में भले ही 'सन्नाटा' छाया रहा, लेकिन शोभायात्रा में उमड़े अपार जनसैलाब ने उल्लास और भक्ति का 'महाकुंभ' खड़ा कर दिया। 10 दिवसीय इस महोत्सव के अंतिम दिन पूरा शहर 'आयो लाल झूलेलाल' और 'जय झूलेलाल' के जयकारों से गुंजायमान रहा।
सांसद दामोदर अग्रवाल ने की पूजा फोटो प्रहलाद तेली
भीलवाड़ा: मुंडन-यज्ञोपवीत से 21 किलो केक के भोग तक: भव्य परंपराएं
भीलवाड़ा जिला मुख्यालय पर चेटीचंड के पावन अवसर पर सिंधी समाज ने अपनी परंपरा और आराध्य के प्रति अगाध श्रद्धा का परिचय दिया। समाज के सभी प्रतिष्ठान और दुकानें दिन भर बंद रहीं।
शोभायात्रा से पहले, सब्जी मंडी स्थित झूलेलाल मंदिर में धर्म और परंपरा का एक अनूठा संगम देखने को मिला। महंत भगत टेऊंराम के सानिध्य में 55 बच्चों का मुंडन और 11 बच्चों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार (जनेऊ) पूरे विधि-विधान से संपन्न हुआ। यह दृश्य अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक था।
सुबह, महंत बाबूगिरी और संत किशनदास द्वारा मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना और ध्वजारोहण किया गया। इस अवसर पर भगवान झूलेलाल को 21 किलो का विशाल केक भोग लगाया गया, जो चेटीचंड के उल्लास को और बढ़ा रहा रहा था। समाजजन ने एक-दूसरे को त्योहार की बधाई दी।
'सन्नाटे' में गूंजी 'जय झूलेलाल'!
भीलवाड़ा शाहपुरा और आसींद में भी चेटीचंड का उत्साह देखते ही बन रहा था। इन कस्बों में भी सिंधी समाज ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रखे। इसके चलते बाजारों और मुख्य मार्गों पर एक अजीब सा सन्नाटा पसरा रहा, जो शाहपुरा और आसींद के इतिहास में समाज की एकजुटता और त्योहार के महत्व को रेखांकित कर रहा था। लेकिन, इस सन्नाटे को तोड़ने के लिए शाम को भव्य शोभायात्राएं निकलीं, जिन्होंने इन कस्बों को भक्ति के रंग में रंग दिया।
घोड़े और सजी-धजी बग्घियां: यात्राओं में सबसे आगे संत-महात्मा और धर्म ध्वजा लिए घोड़े पर सवार समाजजन चल रहे थे। सजी-धजी बग्घियां और रथ सभी के आकर्षण का केंद्र रहे।
पारंपरिक छेज नृत्य: शोभायात्राओं में विभिन्न कॉलोनियों के मंदिरों के पदाधिकारी और हजारों समाजजन शामिल हुए। युवाओं, बच्चों और महिलाओं ने पारंपरिक 'छेज' नृत्य कर यात्रा में उत्साह का रंग भर दिया। युवतियां भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं और पूरे रास्ते नृत्य करती नजर आईं।
स्वागत और भक्तिमय माहौल: यात्राओं का जगह-जगह स्वागत द्वार बनाकर और फूलों की बारिश कर स्वागत किया गया। कई स्थानों पर भव्य आतिशबाजी भी की गई। पूरे मार्ग पर 'जय झूलेलाल' के जयकारों से माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
शोभायात्रा: रथ, घोड़े, आतिशबाजी और फूलों की बारिश!
भीलवाड़ा में शाम को नाथद्वारा सराय मंदिर से शुरू हुई चेटीचंड शोभायात्रा शाहपुरा, आसींद और अन्य स्थानों की तरह शहर के इतिहास की सबसे भव्य और यादगार यात्राओं में से एक रही। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर सिंधुनगर पहुंची, जहाँ इसका विधिवत समापन हुआ।
सिंधी समाज की दुकानों के बंद रहने से शहर में पसरा 'सन्नाटा' और फिर भव्य शोभायात्राओं में उमड़ा 'उल्लास' - यह चेटीचंड महोत्सव भीलवाड़ा, शाहपुरा और आसींद के इतिहास में अपनी अनूठी परंपरा और समाज की एकजुटता के लिए सदैव याद रखा जाएगा।
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