चारभुजा नाथ को जल विहार ,भीलवाड़ा में जलझूलनी एकादशी पर 3 किलोमीटर की पदयात्रा

चारभुजा नाथ को जल विहार ,भीलवाड़ा में जलझूलनी एकादशी पर 3 किलोमीटर की   पदयात्रा
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भीलवाड़ा,हलचल

जलझूलनी एकादशी के पावन अवसर पर भीलवाड़ा शहर में मेवाड़ के आस्था के केंद्र श्री चारभुजा नाथ बड़ा मंदिर, पुराना भीलवाड़ा में भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। श्री राम पेदल यात्री संघ, सुभाष नगर के तत्वावधान में 3 किलोमीटर की भव्य पदयात्रा का आयोजन किया गया, जो शहर में दूसरी बार आयोजित की गई।

भव्य पदयात्रा और उत्साहपूर्ण माहौल




पदयात्रा सुभाष नगर राम मंदिर से शुरू हुई और आरके कॉलोनी चारभुजा नाथ मंदिर, गणेश मंदिर, रोडवेज बस स्टैंड, दूधाधारी गोपाल मंदिर, रघुनाथ मंदिर होते हुए बड़ा मंदिर पहुंची। पुरुष श्वेत वस्त्रों में और महिलाएं लाल चुनरी में भजन गाते हुए, ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-झूमते हुए शामिल हुईं। यात्रा के आगे बैंड बाजे और झंडे माहौल को और उत्साहपूर्ण बना रहे थे। रास्ते में विभिन्न समाजों के पदाधिकारियों ने पुष्प वर्षा और शीतल पेय के साथ यात्रियों का जोरदार स्वागत किया।

मीडिया प्रभारी महावीर समदानी ने बताया कि यह 3 किलोमीटर की पैदल यात्रा 2 घंटे में पूरी हुई। बड़ा मंदिर पहुंचने पर श्री माहेश्वरी समाज श्री चारभुजा जी मंदिर ट्रस्ट के संरक्षक उदयलाल समदानी, रामेश्वर तोषनीवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बाल मुकुंद राठी, मंत्री प्रहलाद भदादा, रामस्वरूप तोषनीवाल, रमेश जागेटिया सहित अन्य ट्रस्टियों ने पदयात्री संघ के कैलाश गगरानी, अनिल बांगड़ और सैकड़ों यात्रियों का दुपट्टा पहनाकर और गुलाब की पुष्प वर्षा के साथ भव्य स्वागत किया।

पदयात्रियों ने भगवान चारभुजा नाथ के दर्शन किए, ध्वजा चढ़ाई और “हाथी घोड़ा पाल की, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों के साथ परिक्रमा की। ट्रस्ट की ओर से उतारी गई ध्वजा यात्रियों को भेंट की गई और प्रसाद वितरित किया गया।

चारभुजा नाथ को जल विहार

श्री माहेश्वरी समाज श्री चारभुजा मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में बड़ा मंदिर में पोड़ावना ग्रुप द्वारा शाम 5 से 6 बजे तक भजन संध्या का आयोजन हुआ। इसके बाद, शाम 6 बजे शोभायात्रा के साथ ठाकुर जी को जल विहार के लिए बड़े मंदिर की बगीची में गाजे-बाजे के साथ ले जाया गया। संध्या आरती के पश्चात चारभुजा नाथ को जल विहार कराया गया, जिसने श्रद्धालुओं में अपार उत्साह का संचार किया।

यह आयोजन भीलवाड़ा में भक्ति और सामुदायिक एकता का प्रतीक बन गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और भगवान चारभुजा नाथ की भक्ति में लीन होकर आनंद लिया।

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