अरिहंत पद की आराधना कर कर्मों का क्षय करे: वीतराग मुनि

अरिहंत पद की आराधना कर कर्मों का क्षय करे: वीतराग मुनि
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आसींद (सुरेन्द्र संचेती)श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, आसींद के सानिध्य में पिछले 10 दिनों से संत ध्यान दर्पण मुनि एवं नवकार महामंत्र आराधक वीतराग मुनि की निश्रा में नवकार महामंत्र एवं पेसठिया छंद आराधना का सामूहिक जाप चल रहा है। बुधवार को नवपद ओली के प्रथम दिवस पर श्राविकाओं ने सामूहिक रूप से आयंबिल तप किए। वीतराग मुनि ने धर्मसभा में कहा कि नवकार महामंत्र से बड़ा इस दुनिया में कोई मंत्र नहीं है। श्रद्धा के साथ इसका जाप करने वालो का जीवन सफल हो जाता है। जिसने भी इसके ऊपर श्रद्धा रखी उसका बेड़ा पार हुआ है। नवपद ओली के प्रथम दिवस पर अरिहंत पद की आराधना करके अपने कर्मों का क्षय करे। नो दिन अलग अलग पदों की आराधना करने का सुअवसर मिला है इसका पूरा लाभ लेवे।

मुनि ने कहा कि सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, दर्शन, ज्ञान , चारित्र, तप की आराधना करनी है। दान ,धर्म ,तप आराधना में सांसारिक प्रतिष्ठा भाव नहीं रखोगे, खाने में रुचि नहीं रखोगे, मन वचन काया को वैराग्य वीतराग भाव में रखोगे उतना ही पुण्यफल अधिक और शीघ्र मिलेगा। भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के पूर्व 29 मार्च को गुरुदेव विकसित मुनि म.सा. का दीक्षा दिवस तप त्याग दान के साथ मनाया जाएगा। मुनि ने कहा कि नवकार महामंत्र एक शाश्वत मंत्र है यह 84 लाख मंत्रों का राजा है। इसमें किसी व्यक्ति विशेष को महत्व नहीं दिया गया है। इसमें गुणों की पूजा है। आसींद संघ के सानिध्य में पिछले 265 सप्ताह से नियमित हर रविवार को नवकार महामंत्र का जाप किया जा रहा है जो अनुकरणीय है। आसींद के श्रावक श्राविकाओं की धर्म के प्रति गहरी रुचि है इसे सदैव बनाए रखे।

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