भीलवाड़ा डेयरी का अनोखा रिकॉर्ड: पांच साल बिना चेयरमैन के

भीलवाड़ा। जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (भीलवाड़ा डेयरी) के इतिहास में एक ऐसा अध्याय जुड़ने जा रहा है, जो शायद ही किसी अन्य सहकारी संस्था में देखने को मिले। डेयरी का मौजूदा संचालक बोर्ड अपना कार्यकाल पूरा कर रहा है, लेकिन यह बोर्ड पांच साल का अधिकांश समय बिना चेयरमैन के ही काम करता रहा।
आगामी 10 अप्रैल को इस बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही डेयरी की कमान एक बार फिर प्रशासक के हाथों में होगी। राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी ने इसकी जानकारी तलब की है और इसके बाद प्रशासक लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
8 अप्रैल 2021 को संचालक मंडल के चुनाव हुए थे और 10 अप्रैल 2021 को रामलाल जाट चेयरमैन निर्वाचित हुए। लेकिन 21 नवंबर 2021 को उन्होंने प्रदेश सरकार में राजस्व मंत्री पद की शपथ ली। 'वन पर्सन-वन पोस्ट' और सहकारी सोसायटी अधिनियम के तहत, 4 दिसंबर 2021 को उन्होंने डेयरी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। तब से डेयरी बिना किसी चेयरमैन के, केवल 11 संचालक मंडल सदस्यों के भरोसे चल रही है। बैठक की अध्यक्षता कोई भी सदस्य करता रहा।
2021 के चुनाव में जिले भर से दिग्गज चेहरों ने जीत दर्ज की थी। इसमें रामलाल जाट, भैरूलाल जाट, गोपाललाल, निंबाराम, मैना माली, केवलचंद जाट, हेमराज, इंद्रा देवी गुर्जर, केदार शर्मा, नानालाल जाट, सुशीला देवी और मानवेंद्र प्रताप सिंह शामिल थे। रामलाल जाट के इस्तीफे के बाद 11 सदस्य ही शेष रहे।
भीलवाड़ा डेयरी में लोकतंत्र और अफसरशाही का मिला-जुला इतिहास रहा है। स्थापना से अब तक 54 सालों में यहां जनप्रतिनिधियों की तुलना में राज प्रशासकों की संख्या अधिक रही है। अब तक 25 जिला कलक्टर यहां प्रशासक की कुर्सी संभाल चुके हैं। सबसे पहले 3 अक्टूबर 1972 को तत्कालीन कलक्टर जगदीशराम शर्मा प्रशासक बने थे।
54 वर्षों में केवल 5 जनप्रतिनिधि ही चेयरमैन बने और कुल 7 बार पद संभाला। पहला चेयरमैन 3 अगस्त 1983 को सूर्यप्रकाश मानसिंहका बने। बाद में लेहरूलाल जाट (1990), छोगालाल गुर्जर (2009) और रतनलाल चौधरी (2010) चेयरमैन रहे। पूर्व अध्यक्ष रामलाल जाट ने 4 फरवरी 1997, 31 अगस्त 2005 और 29 जनवरी 2016 से 21 दिसंबर 2021 तक पद संभाला।
