मेनमेड टेक्सटाइल में विश्व पावर हाउस भीलवाड़ा अब निर्यात में भी बने अग्रणी

भीलवाड़ा, । मेनमेड टेक्सटाइल उत्पादन में विश्व का “पावर हाउस” माने जाने वाले भीलवाड़ा को अब निर्यात के क्षेत्र में भी अग्रणी बनना चाहिए। यह आह्वान मेनमेड फाइबर एवं टेक्निकल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट काउंसिल के चेयरमैन शालीन तोषनीवाल ने मेवाड़ चेम्बर भवन में आयोजित निर्यात संभावनाओं पर कार्यशाला को संबोधित करते हुए किया।
उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा में प्रतिमाह लगभग 9 करोड़ मीटर मेनमेड टेक्सटाइल का उत्पादन हो रहा है, लेकिन निर्यात केवल 50 लाख मीटर प्रतिमाह तक सीमित है। यदि यहां के उद्यमी निर्यात की ओर विशेष ध्यान दें तो उत्पादन के साथ-साथ भीलवाड़ा विश्व का सबसे बड़ा मेनमेड टेक्सटाइल निर्यात केंद्र बन सकता है।
तोषनीवाल ने कहा कि भीलवाड़ा में “इकोनॉमी ऑफ स्केल” की पूर्ण सुविधा उपलब्ध है। यहां स्पिनिंग, वीविंग और प्रोसेसिंग तीनों सेक्टर में विश्वस्तरीय अत्याधुनिक मशीनें स्थापित हैं। यदि निर्यात के लिए विशेष यार्न की आवश्यकता हो तो स्थानीय स्पिनर्स समय पर उपलब्ध करा सकते हैं और वीवर्स लाखों मीटर कपड़ा समय पर डिलीवरी देने में सक्षम हैं।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा टेक्सटाइल निर्यात प्रोत्साहन के लिए कई घोषणाएं की गई हैं तथा कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध है। विभिन्न व्यापार समझौतों के माध्यम से विश्व का लगभग दो-तिहाई बाजार भारत के लिए खुल चुका है। यूरोपियन यूनियन के साथ ट्रेड एग्रीमेंट के बाद निर्यात में बड़ी छलांग की संभावना है। यूरोपियन यूनियन लगभग 33 बिलियन डॉलर का आयात करता है, जबकि भारत का निर्यात मात्र 1 बिलियन डॉलर है। टेक्निकल टेक्सटाइल में भी 36 बिलियन डॉलर के आयात में भारत की हिस्सेदारी केवल 1 बिलियन डॉलर है। जीरो ड्यूटी के लाभ से भारतीय निर्यातकों को चीन के मुकाबले 12 प्रतिशत का शुल्क लाभ मिल सकता है।
राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एस.एन. मोदानी ने कहा कि भीलवाड़ा की विशेषता कम मार्जिन पर बड़े स्तर पर उत्पादन करना है। उन्होंने ‘एम-3 फार्मूला’—मेन, मशीन और मार्केट—पर ध्यान केंद्रित कर निर्यात बढ़ाने का आह्वान किया।
सीआईटीआई के वाइस चेयरमैन दिनेश नौलखा ने कहा कि पूर्व में कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी के कारण भारत की लागत चीन के मुकाबले अधिक थी, जिससे निर्यात प्रभावित हुआ। अब विभिन्न ट्रेड एग्रीमेंट के तहत कच्चे माल पर ड्यूटी लगभग शून्य होने से इस क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा।
मेटेक्सिल के पूर्व चेयरमैन राकेश मेहरा ने कहा कि भीलवाड़ा में सभी संसाधन उपलब्ध हैं, केवल उद्यमियों को अपना माइंडसेट बदलने की आवश्यकता है। मेटेक्सिल के कार्यकारी निदेशक ए. रविकुमार ने विभिन्न व्यापार समझौतों एवं उनके लाभों पर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। घेरजी ऑर्गेनाइजेशन के विकास शर्मा ने भीलवाड़ा के संदर्भ में उत्पादवार निर्यात संभावनाओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम में मेटेक्सिल के पूर्व चेयरमैन रौनक रुघानी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रारंभ में डॉ. आर.सी. लोढ़ा ने स्वागत किया। मानद महासचिव आर.के. जैन, पूर्वाध्यक्ष डॉ. पी.एम. बेसवाल, जे.सी. लढ़्ढा, जे.के. बागडोदिया एवं डी.पी. मंगल ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ से अभिनंदन किया।
