नरेगा में बड़ा खेल: बिना काम किए उठा लिए लाखों, किसान कर्ज के बोझ तले दबे

भीलवाड़ा । जिले की बनेड़ा पंचायत समिति की कासोरिया ग्राम पंचायत में महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत एक बड़ा घोटाला सामने आया है। यहाँ खेत विकास और पशु आश्रय स्थल (छपरे) निर्माण के नाम पर करीब 36.47 लाख रुपये के गबन का आरोप लगा है। विडंबना यह है कि जिन किसानों के नाम पर पैसा स्वीकृत हुआ, उन्हें अपने स्तर पर कर्ज लेकर निर्माण करवाना पड़ा, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में भुगतान पहले ही उठाया जा चुका है।
फर्जी मस्टररोल और कागजी भुगतान का खुलासा
मामला वर्ष 2022 का है, जब 20 पशुपालकों के लिए पशु आश्रय स्थल स्वीकृत किए गए थे। प्रभावित किसान प्यारा पुत्र रामा बैरवा के मामले में आरटीआई से चौंकाने वाला खुलासा हुआ। उनके नाम पर 1,92,199 रुपये की लागत स्वीकृत थी। रिकॉर्ड के अनुसार, ग्राम पंचायत ने फर्जी मस्टररोल के जरिए अकुशल श्रमिकों के नाम पर 1,16,760 रुपये और कुशल श्रमिकों के नाम पर 9,425 रुपये उठा लिए। इसके अलावा, सामग्री के पेटे भी 56,177 रुपये की राशि आहरित कर ली गई। कुल मिलाकर 1,82,362 रुपये का भुगतान उठा लिया गया, लेकिन लाभार्थी को फूटी कौड़ी तक नहीं मिली।
ग्रामीणों के गंभीर आरोप: अवैध वसूली और दबाव
पीड़ित भंवरलाल बैरवा का आरोप है कि पंचायत ने न तो निर्माण सामग्री उपलब्ध कराई और न ही कोई श्रमिक काम पर भेजा। हद तो तब हो गई जब हाल ही में ग्राम विकास अधिकारी ने 9 मार्च 2024 की पुरानी तारीख के बिल पर जबरन हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया। ग्रामीणों का कहना है कि:
अवैध वसूली: छपरे स्वीकृत कराने के नाम पर प्रत्येक लाभार्थी से 10-10 हजार रुपये की अवैध वसूली की गई।
कर्ज का बोझ: भुगतान न मिलने के कारण कई किसानों को ब्याज पर पैसा लेकर निर्माण पूरा करना पड़ा।
सामूहिक घोटाला: इसी तरह 20 अन्य लाभार्थियों के नाम पर भी कुल 36,47,240 रुपये की गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है, जिन्हें कागजों में पूर्ण दिखाकर पैसा उठा लिया गया।
वर्तमान में पीड़ित न्याय के लिए पिछले चार साल से पंचायत के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
