रामनाम सुमिरन से भवसागर पार हो सकता हैं- श्याम राजपुरोहित

रामनाम सुमिरन से भवसागर पार हो सकता हैं- श्याम राजपुरोहित
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आकोला ( रमेश चन्द डाड) कोटडी कस्बे में जहाजपुर रोड स्थित श्री हनुमान मंदिर चौक में आयोजित प्रवचन में श्याम राजपुरोहित गोपाल राजपुरोहित की मुखारविंद से सम्राट सद् गुरु सुखराम महाराज की अण भय वाणी पर प्रवचन करते हुए महाराज ने फरमाया कि जीव संसार में आने से पहले परमात्मा से यह कहकर आया कि सांसारिक जीवन धारण करने पर में राम नाम का सुमिरन करूंगा ! " हे परमात्मा में कभी आपको नहीं भूलूंगा मुझे इस गर्भावस्था से ही बाहर निकाल दे !" लेकिन बाहर आने के बाद मनुष्य सांसारिक मोह- माया में फस जाता है परमात्मा को भूलकर अनैतिक कार्य करने में लग जाता है अमूल्य समय को नष्ट कर काम, क्रोध, मोह, लोभ में फसता ही नहीं बल्कि चौरासी में पुनः आने के कर्म बांध लेता है ! जिंदगी भर जन्म लेना व मृत्यु को प्राप्त करने के चक्र में घूमता ही रहता है ! ब्रह्मा, विष्णु, महेश के द्वारा बनाया यह जीव है !इस मानव जीवन को राम सुमिरन अच्छा नहीं लगता, संसार में कोई किसी का नहीं है, संसार में सिर्फ है तो वह परमात्मा पिता भगवान ही है ! जिसका नाम निरंतर भजकर भवसागर पार कर सकते हैं ! महाराज फरमा रहे हैं कि सांसारिक कार्य करते रहो लेकिन मुखारविंद से निरंतर राम-राम का सुमिरन करते रहो जिससे मानव कल्याण संभव है ! इस मनुष्य जीवन से मोक्ष संभव है तीन लोको में आनंद पथ , अमर पथ, ब्रह्म लोक, तीन लोक चौदह भवन बनाने वाले सदगुरु महाराज ही है ! परमात्मा की प्राप्ति करनी है तो सद्गुरु की शरण में जाना ही होगा राम नाम भक्ति के बिना कोई और शक्ति व भक्ति है ही नहीं ? पांच तत्व की प्राप्ति से भी आगे तत्व है वह ब्रह्म लोक उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति राम नाम भजने में ही निहित है प्रवचन में मेड़ता, नागौर, पुष्कर, मांडलगढ़, भीलवाड़ा, शाहपुरा, रानीखेड़ा आदि स्थानों के भक्तजन उपस्थित थे प्रवचन के आयोजन पूर्व नायब तहसीलदार कैलाश चन्द्र टेलर ने कथा से पूर्व संतो को माल्यार्पण कर, साफा बंधवा कर संतों का सम्मान किया ! इस अवसर पर भंवरलाल सुवालका, रामेश्वर सोनी, बालमुकुंद सोनी, कृष्ण गोपाल मूंदड़ा , भंवर सुथार, रतन सिंह राजपुरोहित, शंकर सिंह राजपुरोहित, बाबूलाल बेड़ा, रामकिशोर सुथार, मोहनलाल, पंकज सोनी आदि भक्तगण उपस्थित थे !

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