जिले के बाल वैज्ञानिकों ने रचा अंतरराष्ट्रीय इतिहास, पनोतिया के छात्रों ने खोजा नया क्षुद्र ग्रह, नासा–IASC ने किया प्रमाणित

जिले के बाल वैज्ञानिकों ने रचा अंतरराष्ट्रीय इतिहास, पनोतिया के छात्रों ने खोजा नया क्षुद्र ग्रह, नासा–IASC ने किया प्रमाणित
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फूलियाकलां (राजेश शर्मा)। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पनोतिया के विज्ञान शिक्षक महेश कुमार कोली के कुशल मार्गदर्शन में यहाँ के बाल वैज्ञानिकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल करते हुए 2024 SD57 नामक एक नए क्षुद्र ग्रह (Asteroid) की खोज की है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को इंटरनेशनल एस्टॉनोमिकल सर्च कोलैबोरेशन (IASC) द्वारा, जो कि नासा का पार्टनर संगठन है, आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया गया है। इसकी पुष्टि सत्र 2024–25 में एक माह तक चले अंतरराष्ट्रीय अभियान के पश्चात इस सत्र में ई-मेल के माध्यम से प्राप्त हुई है। इस खोज में विद्यालय के प्रतिभाशाली छात्रों प्रदीप कुमावत, राजाराम गुर्जर, अर्जुन खाती, धनराज गुर्जर, देवराज लौहार, चेतन बैरवा, बुद्धि प्रकाश कुमावत, हर्षित जांगिड़ ने टीम के रूप में भाग लेते हुए यह उपलब्धि अर्जित की है। यह पहली बार नहीं है जब पनोतिया विद्यालय के छात्रों ने अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी पहचान बनाई हो। इससे पूर्व सत्र 2021–22 में शिक्षक महेश कुमार कोली के मार्गदर्शन में अनिल कुमावत, राधा कुमावत, हनुमान कुमावत एवं रवि रेगर की टीम ने 2022 QV57 नामक क्षुद्र ग्रह की खोज की थी। दोनों अभियानों में शामिल सभी बाल वैज्ञानिकों एवं मार्गदर्शक शिक्षक महेश कुमार कोली को IASC–नासा द्वारा ई-मेल के माध्यम से विशेष प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं। शिक्षक कोली ने बताया कि वर्तमान में दोनों क्षुद्र ग्रह मंगल और बृहस्पति ग्रह के मध्य स्थित मुख्य एस्टेरॉइड पट्टिका में सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं। 2024 SD57 क्षुद्र ग्रह सूर्य की एक परिक्रमा लगभग 4.34 वर्ष में पूरी करता है तथा इसकी पृथ्वी से न्यूनतम दूरी लगभग 13.4 करोड़ किलोमीटर है। वहीं 2022 QV57 क्षुद्र ग्रह सूर्य की एक परिक्रमा लगभग 4.35 वर्ष में पूरी करता है और इसकी पृथ्वी से न्यूनतम दूरी लगभग 15 करोड़ किलोमीटर है। कोली ने जानकारी दी कि जिन तिथियों को इन क्षुद्र ग्रहों की खोज की गई है, उनके आधार पर जब ये क्षुद्र ग्रह सूर्य की अपनी कक्षा में एक पूर्ण परिक्रमा पूरी कर लेंगे, तब खोजकर्ता टीम को अपनी पसंद से इनके नाम रखने का अधिकार प्राप्त होगा। सत्र 2020–21 से निरंतर इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में विद्यार्थियों को शामिल किया जा रहा है। अब तक 75 से अधिक छात्र इस कार्यक्रम में भाग ले चुके हैं और सभी को IASC–नासा द्वारा ‘Citizen Scientist’ सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि न केवल विद्यालय, बल्कि पूरे भीलवाड़ा जिले और राजस्थान के लिए गर्व का विषय है, जो यह सिद्ध करती है कि सरकारी विद्यालयों के छात्र भी अंतरिक्ष विज्ञान में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

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