मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत कांग्रेस देहात का एक दिवसीय उपवास
भीलवाड़ा। आज कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष रामलाल जाट के नेतृत्व में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत एक महत्वपूर्ण उपवास कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम रेलवे स्टेशन के अम्बेडकर सर्किल पर सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मनरेगा के तहत श्रमिकों के काम के अधिकार की रक्षा करना था, जो इन दिनों विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस दौरान सरकार से मनरेगा योजना में पारदर्शिता और सही तरीके से श्रमिकों को उनका हक दिलाने की मांग की। उपवास के दौरान विभिन्न कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को लेकर जन जागरूकता फैलाने के प्रयास किए और सरकार से तत्काल प्रभाव से इस मामले में कार्रवाई करने का आह्वान किया।
कांग्रेस के नेता रामलाल जाट ने कहा कि मनरेगा योजना में अनियमितताएं बढ़ती जा रही हैं और श्रमिकों को उनका वाजिब हक नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में इस उपवास के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाना और इस योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है।
पीसीसी उपाध्यक्ष हगामीलाल मेवाड़ा, पूर्व जिलाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी, व कैलाश व्यास, राजेंद्र त्रिवेदी, ओम, नराणीवाल, पीसीसी सचिव विभा, माथुर, शंकरलाल गाडरी, गोवर्धन, गुर्जर, हेमेंद्र शर्मा, महेश सोनी, दुर्गेश, शर्मा, रणदीप त्रिवेदी, पूर्व जिला प्रमुख, सुशीला सालवी, लादूलाल गुर्जर, ओमप्रकाश तेली, चेतन डीडवानिया, प्रद्यु्न सिंह, मांडल प्रधान शंकर, कुमावत, मांडलगढ़ प्रधान जितेंद्र, मूंदड़ा, पीसीसी मेंबर संदीप जीनगर,शंकर डांगी आदि कार्यकर्ता उपवास पर बैठे हैं।
कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष जाट ने बताया कि उनके नाम को लेकर विरोध नहीं है, हमारा विरोध तो नरेगा को कमजोर करने को लेकर है। पहले मनरेगा के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को काम की कानूनी गारंटी प्राप्त थी और 15 दिनों के भीतर काम उपलध कराना अनिवार्य था। ऐसा नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता मिलता था। अब यह अधिकार न
रहकर सरकार की मर्जी पर निर्भर रह जाएगा। पहले न्यूनतम मज़दूरी की गारंटी थी और साल के 365 दिन काम उपलध रहता था। अब मजदूरी मनमाने ढंग से तय होगी। फसल कटाई के मौसम में काम की अनुमति नहीं होगी। पहले ग्राम पंचायतों को कार्योंं के नियोजन और सिफारिश का अधिकार था तथा ठेकेदारों पर प्रतिबंध था। अब सभी फैसले दिल्ली से लिए जाएंगे, जिससे पंचायतें केवल आदेश लागू करने वाली एजेंसी बनकर रह जाएंगी और ठेकेदारों को बढ़ावा मिलेगा। इसी तरह पहले केंद्र सरकार मजदूरी का 100 प्रतिशत भुगतान करती थी। अब राज्यों को 40 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन करना होगा, जिससे काम उपलध कराने में कठिनाई आएगी।
पूर्व मंत्री जाट ने बताया कि कांग्रेस चार प्रमुख मांगें हैं। पहली, काम, मजदूरी और जवाबदेही की पूर्ण गारंटी। दूसरी, मनरेगा में किए गए बदलावों की तत्काल वापसी। तीसरी काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली और चौथी मांग न्यूनतम वेतन 400 रुपये सुनिश्चित करना है। केंद्र सरकार जब तक यह फैसला वापस नहीं ले लेती तब तक कांग्रेस का विरोध जारी रहेगा।
