LIVE Day - 03 | भीलवाड़ा: "एक लोटा जल दूर करता है तीन दोष", पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया शिव भक्ति का महत्व

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भीलवाड़ा विजय गढ़वाल | शहर में आयोजित शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव भक्ति और गृहस्थ जीवन को लेकर मर्मस्पर्शी विचार साझा किए। कथा की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि घर से एक लोटा जल लेकर मंदिर के लिए निकलने मात्र से ही पितृदोष वास्तु दोष ओर काल सिर्फ दोष सहित तीन बड़े दोष दूर हो जाते हैं।

​वास्तु दोष घर में, पर वैभव मंदिर में मिलेगा

पंडित मिश्रा ने कहा कि घर के वास्तु दोष को तो उपायों से दूर किया जा सकता है, लेकिन जीवन में सुख-समृद्धि और वास्तविक वैभव प्राप्त करने के लिए महादेव के मंदिर तक जाना अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि आप घर में भी शिव को जल अर्पित करते हैं तो वह फलदायी है, लेकिन मंदिर की चौखट तक की यात्रा आपके पितरों को भी तृप्त करती है।


"श्री शिवाय नमस्तुभ्यं" के जाप से बदल जाएगा जीवन, पंडित मिश्रा ने दी तुलसी में जल न चढ़ाने की चेतावनी

​ शिव महापुराण कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने मंत्र शक्ति और धार्मिक क्रियाओं की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि महादेव के मंत्रों का निरंतर जाप न केवल मन को शांति देता है, बल्कि मनुष्य के जीवन के बुरे परिणामों को भी सुखद भविष्य में बदलने की क्षमता रखता है।

​मंत्र जाप से बदलती है जीवन की दिशा

पंडित मिश्रा ने कहा कि जब भक्त बार-बार "श्री शिवाय नमस्तुभ्यं" का उच्चारण करता है, तो उसकी जिंदगी का परिणाम बदलना शुरू हो जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिसने अपने जीवन में भक्ति और मंत्रोच्चार का परिणाम (अभ्यास) शुरू कर दिया, उसके जीवन में सुखों का आगमन निश्चित है। भक्ति का मार्ग ही जीवन की दशा और दिशा दोनों को बदलने का एकमात्र आधार है।

​तुलसी में अभिषेक का जल डालने से लगता है दोष

कथा के दौरान एक महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए मिश्रा ने बताया कि अक्सर लोग भगवान को स्नान कराने के बाद बचा हुआ अभिषेक का जल तुलसी के पौधे में डाल देते हैं, जो कि शास्त्र सम्मत नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले के समय में यह जल पार्कों या क्यारियों में छिड़का जाता था। तुलसी में शिव अभिषेक का जल डालने से 'कालसर्प दोष' लगता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे धर्म के सही स्वरूप को समझें और ऐसी गलतियों से बचें।


​गृहस्थी को बताया सबसे बड़ी साधना

कथा के दौरान मिश्रा ने गृहस्थ जीवन की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि संन्यास लेना सरल है, लेकिन गृहस्थ धर्म निभाना सबसे कठिन तपस्या है। गृहस्थ व्यक्ति को पत्नी, पुत्र और अन्य परिजन अपनी ओर खींचते रहते हैं, इन सबके बीच यदि कोई एक बार भी भगवान का नाम ले लेता है, तो उससे बड़ा कोई उपासक या संत नहीं है।

​श्रद्धालुओं की भक्ति को सराहा

भीलवाड़ा में उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आप सभी बहुत भाग्यशाली हैं जो घर की तमाम जिम्मेदारियों और काम के बोझ के बावजूद कथा सुनने के लिए समय निकालकर यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि पत्थर की मूर्ति को कारीगर बनाता है, लेकिन जब भक्त की श्रद्धा उसमें समाती है, तो वही पत्थर साक्षात भगवान में परिवर्तित होकर आस्था का केंद्र बन जाता है।

"सास-बहू के रिश्तों में भाव की कमी", पंडित मिश्रा ने बताया क्यों महादेव को जल चढ़ाना है सर्वोत्तम

​ पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव महापुराण कथा के दौरान पारिवारिक रिश्तों और जल चढ़ाने के आध्यात्मिक महत्व पर विशेष चर्चा की। उन्होंने कहा कि पत्थर में भगवान तब तक नहीं होते जब तक भक्त का भाव उसमें समाहित न हो जाए। ठीक यही स्थिति मानवीय रिश्तों की भी है।

​भाव से ही बनते हैं रिश्ते और भगवान

पंडित मिश्रा ने समाज में सास और बहू के बीच बढ़ते मनमुटाव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि दोनों के बीच अक्सर एक-दूसरे के प्रति 'भाव' पैदा नहीं हो पाता। उन्होंने उदाहरण दिया कि जिस तरह एक साधारण पत्थर तब तक भगवान नहीं बनता जब तक उसमें श्रद्धा का भाव न हो, उसी तरह रिश्तों में भी जब तक एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव नहीं होगा, तब तक घर मंदिर नहीं बन सकता।

​सिर्फ दो देवताओं को अर्पित होता है जल


शास्त्रों का हवाला देते हुए मिश्रा ने बताया कि हिंदू धर्म में मुख्य रूप से केवल दो ही देवता ऐसे हैं जिन्हें जल चढ़ाया जाता है—पहले देवाधिदेव महादेव और दूसरे सूर्यनारायण भगवान। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान शिव पर अर्पित किया गया जल समस्त देवताओं को तृप्त कर देता है।

​जड़ को पानी देने से खिल उठती हैं पत्तियां

शिव भक्ति की महिमा समझाते हुए उन्होंने एक बेहद सरल उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गमले में लगे पौधे की केवल 'जड़' को पानी देने से फूल और पत्तियां अपने आप खिल उठती हैं और उन्हें अलग से पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती, ठीक उसी प्रकार ब्रह्मांड की जड़ यानी भगवान शंकर को चढ़ाया हुआ जल सभी तैंतीस कोटि देवी-देवताओं तक स्वतः ही पहुंच जाता है।

इससे पूर्व शहर में आयोजित हो रही विख्यात कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की भव्य शिव महापुराण महाकथा के तीसरे दिन की शुरुआत भक्तिमय माहौल में हुई। कथा के शुभारंभ पर व्यासपीठ का पूजन कर पंडित मिश्रा का अभिनंदन किया गया।

**संतों और जनप्रतिनिधियों ने किया स्वागत**


कथा के तीसरे दिन के सत्र के प्रारंभ में नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन (LSG) राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) झाबर सिंह खर्रा महामंडलेश्वर हंसराम महाराज, विधायक गोपाल खंडेलवाल, गो भक्त चितवन व्यास और राजेश कुदाल सहित कई गणमान्य नागरिकों ने पंडित प्रदीप मिश्रा का भावभीना स्वागत किया। इस दौरान व्यासपीठ की आरती उतारी गई और संतों ने कथा की महत्ता पर प्रकाश डाला।

भक्ति की बयार में डूबा भीलवाड़ा


पंडित प्रदीप मिश्रा के मुखारविंद से शिव महिमा सुनने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे हैं।


कथा के दौरान पूरा पंडाल 'श्री शिवाय नमस्तुभ्यं' के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने भजनों पर झूमते हुए भगवान शिव की आराधना की।

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