गुरला-मांडलगढ़ हाइवे चौड़ीकरण की मांग : मोमी, गाडरमाला,बडोद, हमीरगढ़ व अन्य गांवों में बाइपास की भी उठी मांग

गुरला-मांडलगढ़ हाइवे चौड़ीकरण की मांग : मोमी, गाडरमाला,बडोद, हमीरगढ़ व अन्य गांवों में बाइपास की भी उठी मांग
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गुरला (बद्रीलाल माली)। गुरला-मांडलगढ़ मेगा हाइवे, जो भीलवाड़ा जिले का प्रमुख जिला सड़क (MDR 136) है, गुरला और मांडलगढ़ को जोड़ता है। हालांकि, सड़क की गुणवत्ता और संकरे मार्ग के कारण यह क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। गुरला क्षेत्र के निवासी अब इस मार्ग के चौड़ीकरण की मांग कर रहे हैं, ताकि करीब 35 किलोमीटर लंबे इस सड़क को 2, 5, और 7 मीटर की चौड़ाई से बढ़ाकर 7 से 10 मीटर किया जा सके।

स्थानीय लोगों का मानना है कि सड़क का चौड़ा होना न केवल यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि आसपास की लगभग एक दर्जन ग्राम पंचायतों के लोगों को आवागमन में सीधी सुविधा मिलेगी। यह मार्ग क्षेत्रीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन निर्माण के समय जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा की गई अनदेखी के कारण आज भी इस सड़क पर 54 साल पुरानी तकनीकी खामियां मौजूद हैं। इसके कारण सड़क पर कई दुर्घटना स्थल (एक्सीडेंट जोन) बन गए हैं।

गुरला-मांडलगढ़ सड़क पर एक किलोमीटर क्षेत्र में चार 90-90 डिग्री और एक 180 डिग्री का मोड़ है, जो दुर्घटनाओं के लिए प्रमुख कारण बनता है। सड़क निर्माण के समय इन खतरनाक मोड़ों से निजात मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के कारण आज भी ये मोड़ वैसे के वैसे बने हुए हैं। ट्रैफिक के बढ़ने के कारण अब यह मोड़ और भी खतरनाक हो गए हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि हो रही है।

यह सड़क तीन प्रमुख राष्ट्रीय हाइवे – भीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा-राजसमंद, और चित्तौड़गढ़-कोटा को जोड़ती है। इसी सड़क के माध्यम से गाडरमाला, बडोद, हमीरगढ़, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, गंगापुर, मांडलगढ़, और कोटा के बीच यातायात निर्भर करता है। मांडलगढ़ के पास स्थित जोगणिया माता का शक्तिपीठ भी इस मार्ग के उपयोगिता को और बढ़ाता है, जहां सालभर श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है।

ग्रामीणों का कहना है कि संकरी सड़क के कारण न केवल यात्रा का समय बढ़ता है, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना भी बनी रहती है। खासकर, गुरला मोमी के बीच दो बड़े वाहन एक साथ क्रॉस नहीं कर पाते, जिससे सड़क पूरी तरह से जाम जैसी स्थिति में बदल जाती है।

बाईपास की मांग

विशेष रूप से मोमी, गाडरमाला, बडोद, और हमीरगढ़ गांव के हिस्से से गुजरने वाले मार्ग को लेकर ग्रामीणों ने बाईपास निर्माण की मांग की है, ताकि गांवों के भीतर यातायात का दबाव कम हो सके और स्थानीय लोगों को राहत मिल सके। इस संबंध में ग्रामीणों ने सहाड़ा विधायक लादू लाल पितलिया से सरकार स्तर पर आवश्यक पहल करने की अपील की है।

सांसद से मदद की अपील

ग्रामीणों ने भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल से केन्द्रीय सड़क निधि से बजट आवंटित करने की मांग की है, ताकि सड़क चौड़ीकरण किया जा सके और क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके।

ग्रामीणों का तर्क है कि यह सड़क व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ धार्मिक स्थलों तक पहुंच को भी सुगम बनाएगी। उनका मानना है कि अगर समय रहते गुरला से गाडरमाला तक सड़क चौड़ीकरण और मोमी, गाडरमाला, बडोद बाईपास को स्वीकृति मिल जाती है, तो क्षेत्रीय विकास को ठोस आधार मिलेगा और यातायात व्यवस्था में सुधार संभव हो सकेगा। फिलहाल ग्रामीण सरकार के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।

इनका कहना है

"गुरला-मांडलगढ़ सड़क क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन ग्रामीणों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। सड़क की वर्तमान चौड़ाई कम होने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है," – ग्रामीण

"सड़क के चौड़ीकरण को लेकर क्षेत्रीय विधायक को अवगत कराया गया है। यह मार्ग जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार स्तर पर प्राथमिकता से विकसित किया जाएगा," – गोरी शंकर माली, भाजपा मंडल उपाध्यक्ष, कारोई मंडल

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