खस्ताहाल आंगनवाड़ी बनी मौत का जाल! प्रशासन की नींद कब खुलेगी?

खस्ताहाल आंगनवाड़ी बनी मौत का जाल! प्रशासन की नींद कब खुलेगी?
X

भीलवाड़ा प्रकाश चंद्र,सहाड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत पिता का खेड़ा के अधीन भिलों का खेड़ा में स्थित आंगनवाड़ी केंद्र इन दिनों बदइंतजामी और लापरवाही की जीती-जागती मिसाल बन चुका है। हालात इतने भयावह हैं कि यह आंगनवाड़ी अब बच्चों की शिक्षा का केंद्र कम और खतरे का अड्डा ज्यादा नजर आने लगी है। जर्जर हो चुका भवन कभी भी ढह सकता है, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी अब भी जारी है।

👉 ग्रामीणों का आरोप है कि आंगनवाड़ी भवन की दीवारें जगह-जगह से फट चुकी हैं और छत से मलबा गिरने का खतरा हर समय बना रहता है। छोटे-छोटे मासूम बच्चे जान हथेली पर रखकर यहां बैठने को मजबूर हैं। कई अभिभावकों ने तो डर के कारण अपने बच्चों को आंगनवाड़ी भेजना तक बंद कर दिया है, जिससे बच्चों के पोषण और शिक्षा पर भी गहरा असर पड़ रहा है।

के हवाले से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि इस गंभीर समस्या को लेकर ग्राम पंचायत बैठकों में कई बार प्रस्ताव पास किया गया, लेकिन करीब एक साल बीत जाने के बावजूद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर प्रस्ताव फाइलों में ही क्यों दबकर रह गया?

ग्रामीणों में इस मुद्दे को लेकर जबरदस्त रोष देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और पोषण अभियान के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत में मासूम बच्चों को जर्जर और खतरनाक भवन में बैठाकर उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आंगनवाड़ी भवन की मरम्मत या नए भवन का निर्माण नहीं कराया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा या समय रहते मासूम बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे… क्षेत्र की जनता की निगाहें अब जिम्मेदार अधिकारियों पर टिकी हुई हैं।

Next Story