फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र घोटाला! 37 अधिकारी-कर्मचारी अयोग्य पाए गए, विधायक पुत्री पर भी लगे आरोप अब होगी जाँच

फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र घोटाला!  37 अधिकारी-कर्मचारी अयोग्य पाए गए, विधायक पुत्री  पर भी लगे आरोप अब होगी जाँच
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जयपुर/भीलवाड़ा। प्रदेश के कई जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालयों से फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच में तंदुरुस्त लोग दिव्यांग कोटे से सरकारी नौकरी में भर्ती पाए गए हैं। मिलीभगत और बड़े पैमाने पर लेनदेन के सबूत सामने आए हैं।

विधायक पुत्री पर आरोप

सबसे चौंकाने वाला मामला भीलवाड़ा जिले का है, जहां एक विधायक की पुत्री कंचन चौहान पर झूठा दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर नायब तहसीलदार पद पर भर्ती होने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता फणीश कुमार सोनी ने आरएएस भर्ती परीक्षा में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति मिलने की जानकारी संयुक्त शासन सचिव और मुख्यमंत्री को मेल के माध्यम से दी। वर्तमान में वह कार्यवाहक तहसीलदार करेड़ा पद पर तैनात है।

प्रदेशभर में झूठे प्रमाण पत्र

एसओजी की हेल्पलाइन और शिकायतों के आधार पर जांच की गई। जयपुर और भरतपुर से 4-4, जैसलमेर से 2 और सिरोही, जोधपुर, पाली, बाड़मेर, बांसवाड़ा व श्रीगंगानगर से 1-1 फर्जी प्रमाण पत्र पाए गए। कुल 66 अधिकारी-कर्मचारियों को जांच के लिए बुलाया गया, जिनमें 43 लोग मेडिकल बोर्ड के पास पहुंचे। जांच में 37 लोग पूरी तरह स्वस्थ पाए गए, यानी उनके दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जी थे। केवल 6 लोग वास्तविक दिव्यांग पाए गए।

किस पद पर कितने फर्जी प्रमाण पत्र

17 थर्ड ग्रेड टीचर

3 सेकेंड ग्रेड टीचर

4 सहायक प्राध्यापक

2 स्टेनोग्राफर

2 एएनएम (नर्स)

2 पशु चिकित्सक

1-1 एएओ, सूचना सहायक, कनिष्ठ लेखाकार, स्कूल व्याख्याता, कनिष्ठ सहायक, ग्राम विकास अधिकारी, कृषि पर्यवेक्षक

कार्रवाई और आगामी योजना

एसओजी अब इस मामले में जुड़े सीएमएचओ और डॉक्टरों को तलब करेगा। लक्ष्य यह है कि नौकरी दिलाने वाले, फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले और डॉक्टर, सभी के खिलाफ केस दर्ज किया जाए। 23 अधिकारियों को पुनः नोटिस जारी किया गया है और 30 अन्य के खिलाफ और शिकायतें मिली हैं।

तीखी बात

खास बात यह है कि यह सब प्रदेश के आला नेताओं और अधिकारियों की नाके के नीचे हुआ। जयपुर और भरतपुर कार्यालय सबसे अधिक ‘झूठे कागज’ बांटने में शामिल पाए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पूरे प्रदेश में जांच कराई जाए, तो ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं।

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