नर्सेज कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा

भीलवाड़ा। महात्मा गांधी अस्पताल एवं आरवीआरएस मेडिकल कॉलेज के नर्सेज कर्मचारियों का सब्र अब जवाब देने लगा है। राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया है कि नए ऑनलाइन सिस्टम आईएफएमएस 3.0 की तकनीकी खामियों के कारण सैकड़ों नर्सेज कर्मचारी पिछले कई महीनों से आर्थिक तंगी झेलने को मजबूर हैं।
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष नारायण लाल माली ने बताया कि वर्ष 2016 में परमानेंट हुए कर्मचारियों का 9 वर्ष का फिक्सेशन चार महीने पहले हो चुका है, लेकिन सिस्टम की लापरवाही और पोर्टल की खराबी के चलते अभी तक उन्हें बढ़ा हुआ वेतन नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि बजट उपलब्ध होने के बावजूद नर्सेज की सैलरी हर महीने 10 से 15 तारीख के बाद ही जारी हो रही है, जिससे उनके घरेलू खर्च और ईएमआई की व्यवस्था बिगड़ गई है।
नर्सेज एसोसिएशन ने बताया कि सिस्टम की खराबी का असर केवल वेतन तक ही सीमित नहीं है। पोर्टल से सैलरी स्लिप और जीए-55 फॉर्म डाउनलोड नहीं हो पाने के कारण कर्मचारी न तो बैंक से लोन ले पा रहे हैं और न ही अपना इनकम टैक्स भर पा रहे हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक आदेशों में तालमेल की कमी के चलते स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
एसोसिएशन का कहना है कि पीएमओ कार्यालय और नर्सिंग अधीक्षक कार्यालय के बीच कागजी कार्रवाई को लेकर विरोधाभास बना हुआ है, जिसके कारण कर्मचारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक के नाम ज्ञापन भेजकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही समस्याओं का समाधान कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस पूरे मामले की जानकारी जिला कलेक्टर एवं मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल को भी दे दी गई है, ताकि कर्मचारियों को जल्द राहत मिल सके।
