गाडरी समाज का ऐतिहासिक शंखनाद: अफीम-डोडा मुक्त होगा समाज, कुप्रथाओं पर प्रहार

आकोला (रमेश चन्द डाड) । भीलवाड़ा जिले के गाडरी समाज ने नशे के विरुद्ध एक ऐसी बुलंद क्रांति का आगाज किया है, जिसकी गूंज पूरे राजस्थान में सुनाई दे रही है। 'अफीम मुक्त सामाजिक कार्यक्रम' मुहिम के तहत समाज के हर तबके को एकजुट कर नशाखोरी को जड़ से उखाड़ने का संकल्प लिया गया है। इस अभियान के अंतर्गत हजारों समाज जनों से हस्ताक्षर करवाकर शपथ दिलाई जा रही है कि अब सामाजिक आयोजनों में अफीम और डोडा जैसे घातक मादक पदार्थों का उपयोग पूर्णतः वर्जित रहेगा।

आयोजनों में पाबंदी, प्रशासन का सख्त पहरा

समाज के दूरदर्शी नेतृत्व ने निर्णय लिया है कि अब विवाह, मृत्यु भोज, रसोई तथा गमी के 12 दिनों तक चलने वाले किसी भी कार्यक्रम में अफीम-डोडा नहीं परोसा जाएगा। इस मुहिम को प्रभावी बनाने के लिए दर्जनों सक्रिय कमेटियां धरातल पर कार्य कर रही हैं। भीलवाड़ा एसपी धर्मेंद्र सिंह यादव के अटूट समर्थन से इस अभियान को और मजबूती मिली है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध प्रशासनिक सहयोग से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।

स्वस्थ और प्रगतिशील समाज की ओर कदम

यह मुहिम केवल नशा मुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को आर्थिक रूप से समृद्ध और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने की एक बड़ी पहल है। कोठाज श्याम, झरना महादेव, हरनी महादेव, कोटड़ी श्याम और सिंगोली चारभुजानाथ सेवा समितियों के संयुक्त प्रयासों से शुरू हुई यह क्रांति आज पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन चुकी है। समाज सुधार के इस महायज्ञ में हर परिवार अपनी आहुति देने को तत्पर है।

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