50 यात्रियों की सूची दें और अपने क्षेत्र से सीधे लगवाएं बस


पुर उपनगर पुर 16 मार्च को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले 'भागवत समरसता महोत्सव' को लेकर भीलवाड़ा में उत्साह का माहौल है। 27 मार्च से 2 अप्रैल तक चलने वाले इस भव्य आयोजन में श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए आयोजकों ने यातायात की अभूतपूर्व व्यवस्था की है।

​बसों का महाजाल और विशेष ऑफर

आयोजन समिति ने भीलवाड़ा शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के श्रद्धालुओं को कथा स्थल (माधव गौशाला परिसर, नौगांवा) तक पहुँचाने के लिए लगभग दो दर्जन (24) प्रमुख स्थानों पर बसों की व्यवस्था की है। समिति ने एक विशेष पहल करते हुए घोषणा की है कि यदि किसी भी क्षेत्र या मोहल्ले से 50 यात्रियों की सूची तैयार कर ट्रस्ट को भेजी जाती है, तो वहां के लिए अलग से बस की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे दूर-दराज के गांवों से आने वाले बुजुर्गों और महिलाओं को सीधे पांडाल तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं होगी।

​ई-रिक्शा से आसान होगी अंतिम मील की दूरी

भीड़ प्रबंधन और सुगम आवाजाही के लिए ई-रिक्शा का विशेष दस्ता तैनात किया गया है। पुर क्षेत्र में विशेष रूप से 20 ई-रिक्शा संचालित होंगे, जो श्रद्धालुओं को उनके गंतव्य से कथा स्थल तक लाएंगे। इसके अतिरिक्त, जो श्रद्धालु अपने निजी वाहनों से आएंगे, उनके लिए पार्किंग स्थल से मुख्य पांडाल की दूरी तय करने हेतु 10 ई-रिक्शा निरंतर चक्कर लगाएंगे। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि किसी भी श्रद्धालु, विशेषकर दिव्यांगों और वृद्धों को पैदल न चलना पड़े।

​कलश यात्रा और भक्ति का उल्लास

महोत्सव का आगाज 27 मार्च को सुबह 11:00 बजे नौगांवा के चारभुजा नाथ मंदिर से निकलने वाली भव्य शोभायात्रा से होगा। इसमें 500 महिलाएं एक ही वेशभूषा में सिर पर कलश और हाथ में नारियल लेकर मंगल गान करते हुए चलेंगी। हाथी-घोड़ों और बग्गी में सवार गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज के साथ सभी कार्यकर्ता पारंपरिक धोती-कुर्ता पहनकर समरसता का संदेश देंगे।

​सुभाष बाहेती, अलका जोशी और मंजू तंबोली की टीम ट्रांसपोर्ट से लेकर पांडाल तक की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी है। प्रतिदिन दोपहर 1 से 5 बजे तक होने वाली कथा से पूर्व पंडित रमाकांत शर्मा के सानिध्य में यज्ञ-अनुष्ठान भी होंगे। कुल मिलाकर, यह महोत्सव न केवल आध्यात्मिक होगा, बल्कि अपनी चाक-चौबंद व्यवस्थाओं के कारण भी लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कथा में विभिन्न समाजों के गणमान्य नागरिकों को बुलाकर पूजा अर्चना व व्यासपीठ की आरती कराई जाएगी।

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