यूजीसी के विरोध में प्रदर्शन,राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

हमीरगढ़ (अल्लाउद्दीन मंसूरी)। भारत सरकार द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम 2026(यूआईए:1/2026) को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। सोमवार को नगरपालिका क्षेत्र के सामान्य वर्ग के लोगों ने विभिन्न सामाजिक संगठनों व नागरिक समूहों के साथ उपखण्ड कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन विनियमों के कुछ प्रावधान,विशेषकर धारा 3(सी),संविधान विरोधी हैं और सामान्य वर्ग के नागरिकों के लिए पीड़ादायक व हानिकारक हैं।उनका कहना है कि इस धारा के तहत जाति आधारित भेदभाव केवल एससी,एसटी और ओबीसी वर्ग के मामलों में ही मान्य होगा,जबकि सामान्य वर्ग के व्यक्ति के साथ होने वाला उत्पीड़न कानूनी रूप से नहीं गिना जाएगा।विरोधकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि यदि किसी सामान्य वर्ग के व्यक्ति के खिलाफ झूठी शिकायत की जाती है तो शिकायतकर्ता पर कोई जवाबदेही तय नहीं होगी।इससे विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति,धर्म व लिंग के आधार पर वैमनस्य बढ़ने तथा योग्य शिक्षकों व शोधार्थियों को झूठी शिकायतों का शिकार होना पड़ सकता है।प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रपति के नाम उपखण्ड अधिकारी झंवर लाल मित्तल को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई कि इन विनियमों की समीक्षा की जाए अथवा इन्हें सभी वर्गों पर समान रूप से लागू किया जाए,अन्यथा नियमों को पूर्णतः वापस लिया जाए। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।प्रशासन ने ज्ञापन को उच्च स्तर तक भेजने का आश्वासन दिया है।फिलहाल यूजीसी समता विनियम 2026 को लेकर विरोध व चर्चा दोनों जारी हैं।
