रुक्मणी विवाह प्रसंग से 1.71 लाख जुटाकर बच्चों की मदद



​भीलवाड़ा । आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सरोकार के संगम के रूप में चल रहे भागवत महोत्सव में शनिवार को एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया गया। रामस्नेही संत दिग्विजयराम महाराज की प्रेरणा से कथा के दौरान 'रुक्मणी विवाह' के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई राशि को समाज के वंचित वर्ग के कल्याण हेतु सौंपा गया। संत दिग्विजयराम महाराज ने इस अवसर पर कहा कि सनातन संस्कृति केवल अध्यात्म तक सीमित नहीं है, बल्कि परोपकार और नर-सेवा ही नारायण-सेवा का वास्तविक मार्ग है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वे वंचित और निशक्त बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए सदैव तत्पर रहें। कथा के दौरान जब रुक्मणी विवाह का प्रसंग आया, तब संत ने 'कन्यादान' हेतु उपस्थित जनसमूह से अपील की। मात्र आधे घंटे के भीतर श्रद्धालुओं ने स्वेच्छा से ₹1,71,551 की राशि 'झोली' में एकत्रित की। यह समस्त राशि केशव प्रन्यास ट्रस्ट को सौंपी गई। इस राशि का उपयोग घुमंतू जाति के बच्चों के लिए संचालित 'संत कनिफनाथ घुमंतू छात्रावास' के विकास और वहां रह रहे छात्रों की सुविधाओं के लिए किया जाएगा। इसी सेवा कार्य की कड़ी में, संत दिग्विजयराम ने सेवा आश्रम स्कूल के मूकबधिर बच्चों के लिए 51,000 का चेक पृथक से भेंट किया। वर्तमान में भगवती सेवा संस्थान द्वारा संचालित इस स्कूल में 47 दिव्यांग बच्चे अध्ययनरत हैं। ​राशि हस्तांतरण के दौरान श्री केशव स्मृति सेवा प्रन्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष हीरालाल टेलर, सचिव रविंद्र मानसिंहका, कोषाध्यक्ष गोविंद सोडाणी, गणेश सुधार, विशाल गुरुजी सहित संगठन के अन्य कार्यकर्ता और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। ​

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