गली-मोहल्लों में सजने लगे होली के डांडे, पर्व की तैयारियां शुरू, रंग गुलाल की हो रही ब‍िक्री

गली-मोहल्लों में सजने लगे होली के डांडे, पर्व की तैयारियां शुरू, रंग गुलाल की हो रही ब‍िक्री
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भीलवाड़ा हलचल - फोटो : प्रहलाद तेेेली

भीलवाड़ा। फाल्गुन मास में होली की रंगत घुलने लगी है। शहर से लेकर गांव तक, गली-मोहल्लों और प्रमुख चौराहों पर 'होली का डांडा' रोपने की परंपरा के साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक इस महापर्व का उल्लास शुरू हो गया है। बसंत पंचमी के बाद से ही शुभ मुहूर्त देखकर विभिन्न समाजों और मोहल्ला समितियों द्वारा डांडा रोपण का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

परंपरा और उत्साह का संगम

शास्त्रों के अनुसार, होली का डांडा रोपना इस बात का संकेत है कि अब भक्त प्रहलाद की रक्षा और होलिका के अंत की तैयारी शुरू हो चुकी है। शहर के गुलमंडी, धानमंडी, शास्त्री नगर, सुभाष नगर और पुराने भीलवाड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं और बुजुर्गों की टोली ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर डांडा रोपा। जैसे-जैसे दिन बीतेंगे, इस डांडे के चारों ओर लकड़ियां, घास और उपले (कंडे) एकत्रित करने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

भीलवाड़ा हलचल के लि‍ए फोटो - प्रहलाद तेेेली

बाजारों में भी दिखने लगा असर

डांडा रोपण के साथ ही बाजारों में भी हलचल बढ़ गई है। किराना दुकानों पर रंग-गुलाल, अनेक तरह की प‍िचकार‍ियां और पापड़-मंगोड़ी बनाने के सामान की मांग बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों से लकड़ियों और कंडों की आवक भी शुरू होने वाली है। मोहल्लों में शाम के समय चंग की थाप और फाग गीतों की गूंज भी सुनाई देने लगी है, जो वातावरण को पूरी तरह फाल्गुनी बना रही है।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

इस बार कई मोहल्ला समितियों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए सूखी लकड़ियों के स्थान पर गाय के गोबर से बने कंडों (गोबर के बड़कुले) का अधिक उपयोग करने का निर्णय लिया है। युवाओं में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है और टोलियां बनाकर अभी से होली के आयोजन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

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