सोच सकारात्मक होगी तो जीवन की गति सही दिशा में बढ़ेगी : आदित्य महाराज

भीलवाड़ा | आज कोई भी व्यक्ति 24 घंटे धार्मिक क्रियाएं नहीं कर सकता, लेकिन यदि मन में धर्म भाव बना रहे तो वह जीवन में शांति की ओर बढ़ता है। यह उद्गार दिगम्बर संत आदित्यसागर महाराज ने सोमवार को प्रातःकालीन सभा में व्यक्त किए।
महाराज ने जीवन में सुख-शांति के 15 उपायों पर प्रकाश डालते हुए शरणागति, धार्मिकता, आत्मविश्वास के बाद सकारात्मक सोच और लक्ष्य निर्धारण को अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि जीवन की गति व्यक्ति की सोच पर निर्भर करती है। परिस्थितियां अनुकूल या प्रतिकूल आती-जाती रहती हैं, लेकिन सकारात्मक सोच व्यक्ति को आगे बढ़ने से नहीं रोकती।
उन्होंने 1951 का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे ने “मैं कर सकता हूं” की भावना के साथ माउंट एवरेस्ट पर विजय प्राप्त की। संतश्री ने कहा कि समझदार व्यक्ति हर नुकसान में भी लाभ देखता है। राजा और मंत्री की कथा के माध्यम से उन्होंने समझाया कि दुर्घटना या चोट में भी नकारात्मक दृष्टि नहीं रखनी चाहिए।
व्यापारियों को संदेश देते हुए संतश्री ने कहा कि यह नहीं सोचना चाहिए कि पड़ोसी के यहां ग्राहक न जाएं, बल्कि यह भावना रखें कि मेरे यहां और अधिक ग्राहक आएं।
उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए 13-14 वर्ष की उम्र में ही लक्ष्य तय कर लेना चाहिए। सीए बनने की इच्छा रखने वाला विद्यार्थी इंजीनियरिंग या एमबीबीएस की पढ़ाई नहीं करता। जीवन की दौड़ अंतहीन है, इसलिए कमाई के साथ-साथ स्वयं के लिए भी समय निकालना जरूरी है। प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट आत्मशांति के लिए अवश्य निकालें।
ट्रस्ट अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि धर्मसभा के प्रारंभ में संत कुमार, विपुल व अतुल पाटनी ने ससंघ पादपक्षालन कर शास्त्र भेंट किए।
उपाध्यक्ष चैनसुख शाह ने बताया कि नित्य अभिषेक व शांतिधारा के अंतर्गत सनतकुमार–ममता अजमेरा परिवार की ओर से 108 ऋद्धि मंत्र अभिषेक, स्वर्ण मुकुट धारण एवं स्वर्ण झारी से शांतिधारा की गई।
सचिव अजय बाकलीवाल ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः 6 बजे गुरु पूजा, 7 बजे नित्य अभिषेक व शांतिधारा, 7.45 बजे नीति कक्षा, 8.30 बजे मंगल प्रवचन, सायं 5.45 बजे श्रुत समाधान एवं 6.30 बजे आरती के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।
