प्रतिबंध को ठेंगा...धड़ल्ले से बिक रहा चाइनीज मांझा

भीलबाड़ा। मकर संक्रांति का पर्व नजदीक है, मगर सरकार व प्रशासन के तमाम प्रतिबंधों के बावजूद शहर के बाजारों और गली मोहल्लो में चाइनीज मांझा की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। यह मांझा कांच के बुरादे और धातुओं के मिश्रण से बने होने से आसानी से नहीं टूटता। इसके चलते पक्षी चपेट में आते हैं, जिससे सैकड़ों पक्षी दम तोड़ देते हैं। इसके अलावा वाहन चालकों के लिए भी यह खतरनाक है। हर साल ऐसी घटनाए सामने आती है, जिसमे दुपहिया वाहन सवार घायल हो चुके है। धातुओं के मिश्रण से बने होने से बिजली की लाइनों के संपर्क में आने पर करंट लगने का भी डर बना रहता है। गौरतलब है की गत वर्ष भी बाबू लाल खटीक नेहरू रोड से गुजरने के दौरान चाइनीज मांझा लगी पतंग की चपेट में आ गया, इस हादसे में उसके गले में गहरा घाव हो गया।
कार्रवाई के बाद भी बैखोफ...
शहर में सुभाष नगर थाना पुलिस ने चाइनीज मांझे पर कार्रवाई करते हुए चाइनीज मांझे से भरी 155 चकरी और हाथ से मांझा भरने वाली मशीन बरामद की है, इस दौरान पुलिस ने छह व्यक्तियों को शांति भंग में गिरफ्तार किया है। धागा भरने की मशीन जब्त की थी।
ऐसे बनता है मांझा...
यह मांझा नायलॉन के धागे में मैटेलिक पाउडर मिलाकर तैयार होता है। धागे पर कांच और लोहे को पीस कर नॉयलन के धागे पर लगाते है। ये धागा प्लास्टिक जैसा दिखता है और काफी स्ट्रेचेबल होता है। खींचने के बाद इसका खीचाव और बढ़ने लगता है न कि टूटता है।
