भरनी नाके से अवैध बजरी का खेल: दिनदहाड़े बूंदी तक सप्लाई, प्रशासन को खुली चुनौती

भरनी नाके से अवैध बजरी का खेल: दिनदहाड़े बूंदी तक सप्लाई, प्रशासन को खुली चुनौती
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शक्करगढ़ | क्षेत्र में एक बार फिर अवैध बजरी खनन और परिवहन का काला कारोबार परवान चढ़ने लगा है। बनास नदी के सीने को छलनी कर बजरी माफिया दिनदहाड़े सरकारी तंत्र को ठेंगा दिखा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि बजरी से लदे ट्रैक्टर और डंपर अमरगढ़ चौकी और शक्करगढ़ थाना क्षेत्र के बिल्कुल करीब से बेखौफ होकर गुजर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की चुप्पी ने माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं।

रूट फिक्स, बेखौफ परिवहन

सूत्रों के मुताबिक, बजरी माफियाओं ने परिवहन के लिए बाकायदा सुरक्षित रूट तैयार कर लिए हैं। माफिया भरनी नाके से अवैध बजरी भरकर खजुरी–किशनगढ़ होते हुए बाकरा और भोरन चौराहे से गुजरते हैं। यहाँ से शक्करगढ़ थाना क्षेत्र के पास से होते हुए सीधी सप्लाई पड़ोसी जिले बूंदी तक की जा रही है। इस अवैध कारोबार के जरिए माफिया प्रतिदिन लाखों रुपए की काली कमाई कर रहे हैं।

हनुमद धाम के पास चारागाह भूमि पर कब्जा

अवैध खनन का असर अब सरकारी संपत्तियों पर भी दिखने लगा है। शक्करगढ़ स्थित प्रसिद्ध हनुमद धाम के पास ग्राम पंचायत और चारागाह भूमि को माफियाओं ने अपना 'शॉर्टकट' बना लिया है। यहाँ अवैध रास्ता बनाकर भारी वाहन निकाले जा रहे हैं, जिससे न केवल सरकारी भूमि को नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि स्थानीय पर्यावरण भी पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीणों में रोष, कार्रवाई की मांग

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और पुलिस की नाक के नीचे यह सब चल रहा है, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि चारागाह भूमि में बने अवैध रास्तों को तुरंत जेसीबी से खुदवाकर बंद किया जाए और बजरी परिवहन पर प्रभावी रोक लगाई जाए।

फैक्ट बॉक्स: ऐसे चल रहा अवैध बजरी का काला कारोबार

उद्गम: बनास नदी क्षेत्र से मशीनों द्वारा भारी मात्रा में भरी जा रही बजरी।

प्रमुख रूट: भरनी नाके से खजुरी–किशनगढ़ होते हुए बूंदी की ओर सप्लाई।

सुरक्षा में सेंध: शक्करगढ़ थाना क्षेत्र और अमरगढ़ चौकी के पास से बेरोकटोक गुजर रहे वाहन।

अतिक्रमण: चारागाह और पंचायत भूमि पर बना लिया अवैध रास्ता।

कीमत: एक ट्रैक्टर ट्रॉली की 7 से 8 हजार रुपए की मोटी रकम में हो रही बिक्री।

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