पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR मामले में हाईकोर्ट का बड़ा हस्तक्षेप, अधीनस्थ न्यायालय के आदेश पर लगाई रोक

भीलवाड़ा | राजस्थान हाई कोर्ट, जोधपुर की एकल पीठ पर माननीय न्यायाधीश जस्टिस फ़रज़न्द अली ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज न करने और जांच नहीं कराने के अधीनस्थ न्यायालय के आदेश पर स्थगन लगा दिया है। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया यह मानते हुए कि मामले में मुकदमा दर्ज करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
यह मामला मांडल निवासी ज़ाहिद हुसैन अंसारी के कथित अपहरण और मारपीट से जुड़ा है, जिसमें उस समय मांडल पुलिस थाने में तैनात कई पुलिसकर्मियों की संलिप्तता बताई गई है। पीड़ित ज़ाहिद हुसैन द्वारा पहले पुलिस थाने में इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दी गई थी, लेकिन पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की।
इसके बाद ज़ाहिद हुसैन ने न्यायालय में इस्तगासा दायर कर मुकदमा दर्ज कर जांच कराने की मांग की, लेकिन अधीनस्थ न्यायालय ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और जांच के आदेश देने से इनकार कर दिया था।
अधीनस्थ न्यायालय के इस आदेश को ज़ाहिद हुसैन अंसारी ने अपने अधिवक्ता पंकज चौधरी के माध्यम से क्रिमिनल रिट याचिका के जरिए राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट में हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अधीनस्थ न्यायालय के आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब पेश करने के निर्देश दिए। इस आदेश के बाद पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं और मामले को लेकर न्यायिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
